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Record Defense Budget के बाद भी फिसले शेयर, निवेशकों की उम्मीदों पर फिरा पानी!

Record Defense Budget
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Record Defense Budget : पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के बाद केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए रक्षा बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की। वर्ष 2026 के लिए डिफेंस सेक्टर को ₹7.85 लाख करोड़ आवंटित किए गए, जो अब तक का सबसे बड़ा रक्षा बजट है। यह पिछले साल के मुकाबले करीब 15 प्रतिशत अधिक है। इतने बड़े बजट के बाद भी शेयर बाजार ने डिफेंस सेक्टर को हाथोंहाथ नहीं लिया।

निफ्टी डिफेंस इंडेक्स 1 फरवरी को करीब 5.6 प्रतिशत टूटा और इसके बाद भी गिरावट थमी नहीं। ताजा कारोबार में इंडेक्स करीब 1.76 प्रतिशत और फिसल गया। निवेशक हैरान हैं कि जब सरकार इतना खर्च करने जा रही है, तो शेयरों में बिकवाली क्यों दिख रही है।

Record Defense Budget के बाद भी फिसले शेयर

डिफेंस शेयरों में सबसे ज्यादा मार भारत डायनामिक्स पर पड़ी, जो करीब 6 प्रतिशत तक टूट गया। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स, कोचिन शिपयार्ड, मझगांव डॉक और पारस डिफेंस जैसे दिग्गज शेयर भी 2 से 3 प्रतिशत की गिरावट में रहे। इस सुस्ती के बीच केवल डेटा पैटर्न्स और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स ऐसे नाम रहे, जिन्होंने मजबूती दिखाई। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म नोमुरा का मानना है कि बजट में रकम तो बढ़ी, लेकिन कोई ऐसा बड़ा एलान नहीं हुआ जिसने बाजार की उम्मीदों को नया जोश दिया हो। निवेशक खासतौर पर नए मेगा प्रोजेक्ट्स, बड़े ऑर्डर या स्पष्ट टाइमलाइन की उम्मीद कर रहे थे, जो बजट भाषण में नजर नहीं आई।

रफ्तार धीमी

CLSA का आकलन है कि वित्त वर्ष 2026 में रक्षा खर्च की वृद्धि दर, पिछले साल की तुलना में कुछ धीमी रह सकती है। इसका असर शेयरों की शॉर्ट टर्म चाल पर पड़ सकता है। हालांकि, ब्रोकरेज यह भी मानते हैं कि कैपिटल एक्सपेंडिचर में लगातार बढ़ोतरी से मध्यम अवधि में कंपनियों की ऑर्डर बुक मजबूत होगी। CITI का कहना है कि रक्षा क्षेत्र में लोकलाइजेशन पर सरकार का जोर घरेलू कंपनियों के लिए फायदेमंद है। आयात पर निर्भरता घटने से भारतीय कंपनियों को ज्यादा ऑर्डर मिल सकते हैं। साथ ही चेतावनी भी है कि हाल के महीनों में आए तेज उछाल के बाद निकट भविष्य में डिफेंस शेयरों में तेजी सीमित रह सकती है।

निवेशकों की रणनीति पर असर

बाजार जानकारों के मुताबिक फिलहाल डिफेंस शेयरों में मुनाफावसूली का दौर चल रहा है। लंबी अवधि के निवेशक इसे अवसर के रूप में देख सकते हैं, लेकिन शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। सरकारी नीतियों की स्पष्टता और नए ऑर्डर ही अगली दिशा तय करेंगे।

डिफेंस सेक्टर में गिरावट यह दिखाती है कि शेयर बाजार सिर्फ बजट के आंकड़ों से नहीं, बल्कि भविष्य की स्पष्टता से चलता है। रिकॉर्ड आवंटन लंबी अवधि के लिए मजबूत संकेत है, लेकिन निवेशक ठोस प्रोजेक्ट्स और ऑर्डर फ्लो देखना चाहते हैं। आने वाले महीनों में अगर घरेलू कंपनियों को बड़े कॉन्ट्रैक्ट मिलते हैं, तो मौजूदा सुस्ती टूट सकती है। फिलहाल, धैर्य और चयनात्मक निवेश ही समझदारी मानी जाएगी।

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Will the middle class get relief from the first general budget of Modi 3.0?