Republic Day 2026 : गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित भारत पर्व में इस बार बिहार को खास मंच मिलने जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के तत्वावधान में होने वाले इस आयोजन में बिहार की झांकी का चयन किया गया है, जिसका प्रदर्शन नई दिल्ली के ऐतिहासिक लालकिला परिसर में किया जाएगा। यह झांकी राज्य की पारंपरिक ताकत, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और वैश्विक पहचान को एक साथ प्रस्तुत करेगी।
बिहार की झांकी का मुख्य विषय है, “मखाना: लोकल से ग्लोबल की थाली में सुपरफूड”। यह थीम बताती है कि कैसे मिथिलांचल के तालाबों में उगने वाला मखाना आज दुनिया के बड़े बाजारों तक अपनी पहचान बना चुका है। झांकी के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि स्थानीय संसाधन सही दिशा मिले तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना सकते हैं।
Republic Day पर बिहार की खास पहचान
मखाना को बिहार का ‘सफेद सोना’ कहा जाता है, और यह उपमा पूरी तरह सार्थक भी है। भारत दुनिया की कुल मखाना आपूर्ति का बड़ा हिस्सा देता है, जिसमें बिहार की हिस्सेदारी करीब 85 से 90 प्रतिशत तक है। मिथिला क्षेत्र का मखाना न केवल देश में, बल्कि विदेशों में भी एक सुपरफूड के रूप में लोकप्रिय हो चुका है। वर्ष 2022 में मिथिला मखाना को जीआई टैग मिलना इसकी विशिष्ट पहचान को और मजबूत करता है।
झांकी में दिखेगी पूरी यात्रा
इस झांकी की दृश्य रचना को दो प्रमुख हिस्सों में बांटा गया है। पहले भाग में कमल के पत्तों के बीच उभरता सफेद मखाना, उसके साथ जीआई टैग का प्रतीक और किनारों पर पारंपरिक मिथिला पेंटिंग की कलात्मक बॉर्डर दिखाई देगी। झांकी के दूसरे भाग में मखाना की पूरी उत्पादन प्रक्रिया को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें कटाई, बीज संग्रह, ग्रेडिंग, भुनाई, फोड़ाई, पैकिंग और क्वालिटी चेक तक के हर चरण को दर्शाया जाएगा। एक ओर मिट्टी के चूल्हे पर लोहे की कढ़ाही में मखाना भूनती महिला दिखाई देगी, तो दूसरी ओर लकड़ी के मूसल से दाने फोड़ता कारीगर पारंपरिक श्रम का प्रतीक बनेगा।
महिला सहभागिता
इस दौरान यह दिखाया जाएगा कि कैसे मखाना की खेती और प्रसंस्करण ने हजारों परिवारों की आजीविका को सहारा दिया है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है। भारत पर्व के माध्यम से देश की सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक विविधताओं को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। बिहार की यह झांकी ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सशक्त रूप से आगे बढ़ाएगी और यह साबित करेगी कि परंपरा, परिश्रम और आधुनिक सोच मिलकर किसी भी क्षेत्र को वैश्विक पहचान दिला सकते हैं।
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