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Ratha Saptami 2026: सूर्य उपासना का महापर्व, अर्क स्नान की परंपरा और सेहत से जुड़ा रहस्य

Ratha Saptami 2026
Ratha Saptami 2026

Ratha Saptami 2026 : हिंदू पंचांग के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाने वाला रथ सप्तमी पर्व सूर्य देव के अवतरण का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान सूर्य सात घोड़ों के रथ पर आरूढ़ होकर पृथ्वी पर प्रकट हुए थे। यही कारण है कि इस तिथि को “सूर्य जयंती” या “माघ सप्तमी” भी कहा जाता है। देशभर में इस दिन श्रद्धालु सूर्य उपासना, स्नान और दान-पुण्य के माध्यम से पुण्य अर्जित करते हैं।

रथ सप्तमी की सबसे विशिष्ट परंपरा ‘अर्क स्नान’ है। इस स्नान में ‘मदार’ या ‘अर्क’ के पत्तों का विशेष प्रयोग किया जाता है। परंपरा के अनुसार सात पत्तों को शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर रखा जाता है, जिसमें एक सिर पर, दो कंधों पर, दो घुटनों पर और दो पैरों पर शामिल है।

Ratha Saptami 2026

इसके बाद स्नान कर सूर्य देव को जल अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, यह प्रक्रिया सात जन्मों के पापों से मुक्ति दिलाने और जीवन में शुद्धता लाने का प्रतीक मानी जाती है। धर्मग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि रथ सप्तमी का स्नान विशेष पुण्य प्रदान करता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन किया गया दान, व्रत और सूर्य पूजन अक्षय फल देता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन सूर्य ग्रह की स्थिति को सुदृढ़ करने का अवसर मिलता है, जिससे मान-सम्मान, आत्मबल और करियर में उन्नति के योग बनते हैं।

मदार के पत्तों का महत्व

अर्क स्नान के पीछे आयुर्वेदिक आधार भी बताया जाता है। मदार के पौधे में औषधीय गुण पाए जाते हैं, जिनका उपयोग त्वचा रोगों और सूजन से राहत के लिए किया जाता है। प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों में माना गया है कि मदार के पत्तों का स्पर्श शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर करने में सहायक हो सकता है। मान्यता है कि स्नान के दौरान सिर पर मदार के पत्ते रखने से मानसिक तनाव कम होता है। यह प्रक्रिया माइग्रेन, सिरदर्द और मानसिक थकान से राहत दिलाने में सहायक मानी जाती है। कई परंपरागत उपचार प्रणालियों में इसे शरीर के तापमान को संतुलित रखने का प्राकृतिक उपाय बताया गया है।

विटामिन D सेहत के लिए लाभकारी

रथ सप्तमी वसंत ऋतु के आगमन का संकेत भी मानी जाती है। इस समय सूर्य की किरणें शरीर के लिए फायदेमंद होती हैं। सुबह-सुबह सूर्य के प्रकाश में किया गया स्नान विटामिन D के अवशोषण में मदद करता है, जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं और रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। इस दिन स्नान से पहले सूर्य देव का ध्यान करना और “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह अनुष्ठान जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आरोग्य और समृद्धि लेकर आता है।

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