Secret Navratri 2026:- माघ महीने के गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। आज गुप्त नवरात्रि का दूसरा दिन है और इस दिन को देवी तारिणी को अर्पित किया गया है। देवी तारिणी वो है जो अपने भक्तों के सभी कष्टों को हर लेती है। गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन अगर आप देवी तारिणी की आरती करते हैं तो आपको कई बाधाओं से छुटकारा मिल जाता है। आइए जानते है कैसे मां देवी तारिणी प्रसन्न होंगी।
देवी तारिणी की आरती का महत्व
गुप्त नवरात्रि के दौरान 10 महाविद्याओं में देवी तारिणी का स्थान बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इनका स्थान दूसरे नंबर पर आता है अगर आप इनकी पूजा विधि विधान से करते हैं तब ऐसे में आपके करियर में आने वाली सभी समस्याएं समाप्त होती है साथ ही कोर्ट-कचहरी के मामलों में छुटकारा मिलता है आर्थिक उन्नति बनी रहती है और विधिवत पूजा और आरती करने से सभी परेशानियों का हल मिलने लगता है।
।। तारा देवी की आरती ।।
जय तारा तुम जग विख्यात,
ब्रह्माणी रूप सुन्दर भात।
चंद्रमा कोहनी भ्राजत,
हंस रूप बन माँ तुम आई।
कनकवाले केशों में,
धूप-दीप फिर सजे।
कंबल नीला, वस्त्र सुंदर,
चरणों में अंगूर सजे।
चन्दन बासम बिलोचन पर,
बेल पत्रानि मला धरू।
भक्तों के काज राखो,
शंकर मन्दिर विशेष आयूं।
जय तारा तुम जग विख्यात,
ब्रह्माणी रूप सुन्दर भात।।
।।मां दुर्गा की आरती।।
ॐ जय अम्बे गौरी…
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुख हरता । सुख संपति करता॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
भुजा चार अति शोभित, खडग खप्पर धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
Read More:- उत्तरप्रदेश के आगरा में लगी आग, दमकल टीम की तीन गाड़ियों ने पाया आग पर काबू





