Gautam Gambhir : भारतीय क्रिकेट में गौतम गंभीर का नाम हमेशा जुझारूपन, आत्मविश्वास और जीत की भूख से जुड़ा रहा है। बतौर बल्लेबाज उन्होंने कई यादगार पारियां खेलीं, इसलिए जब जुलाई 2024 में उन्हें टीम इंडिया का हेड कोच बनाया गया, तो उम्मीदें भी उसी स्तर की थीं। माना जा रहा था कि गंभीर का आक्रामक रवैया टीम को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा, लेकिन वक्त बीतने के साथ तस्वीर कुछ और ही नजर आने लगी।
गंभीर की कोचिंग में भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 और एशिया कप 2025 जैसे बड़े खिताब अपने नाम किए। इन जीतों ने कुछ समय के लिए आलोचनाओं को शांत जरूर किया, लेकिन इसके समानांतर जो हारें मिलीं, उन्होंने इन सफलताओं की चमक फीकी कर दी। खासतौर पर घरेलू मैदान पर बने नकारात्मक रिकॉर्ड्स ने टीम मैनेजमेंट को कटघरे में खड़ा कर दिया।
Gautam Gambhir
सबसे बड़ा झटका तब लगा, जब न्यूजीलैंड ने भारत को उसी के घर में घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। 37 साल में पहली बार भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज गंवाई। इंदौर के होलकर स्टेडियम में मिली हार उस मैदान के अपराजेय रिकॉर्ड का भी अंत था। विराट कोहली का शतक भी इस हार को टाल नहीं सका। गंभीर के कार्यकाल में टेस्ट क्रिकेट में हालात और भी चिंताजनक रहे।
12 साल बाद पहली बार भारत ने घरेलू टेस्ट सीरीज गंवाई और 25 साल में पहली बार घर पर क्लीन स्वीप का सामना किया। न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट में 46 रन पर सिमटना और रनों के लिहाज से सबसे बड़ी हार दर्ज होना, भारतीय टेस्ट इतिहास के काले अध्याय बन गए।
युवा कीवी टीम ने बढ़ाई शर्मिंदगी
हैरानी की बात यह रही कि जिन न्यूजीलैंड खिलाड़ियों ने भारत को हराया, उनमें कई इस सीरीज में पहली बार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे थे। युवा और अनुभवहीन मानी जा रही कीवी टीम ने भारतीय क्रिकेट की मजबूत मानी जाने वाली घरेलू दीवार को ढहा दिया। इससे चयन नीति और रणनीति दोनों पर सवाल खड़े हुए। इन नतीजों का असर सिर्फ कोच गौतम गंभीर पर नहीं पड़ा, बल्कि कप्तान शुभमन गिल की लीडरशिप भी सवालों के घेरे में आ गई। घरेलू सीरीज हारने और फॉर्म से जूझने के कारण उनकी कप्तानी की साख कमजोर हुई। यहां तक कि उन्हें टी20 टीम से बाहर भी होना पड़ा।
गंभीर युग के रिकॉर्ड
गंभीर के कोच रहते भारत ने श्रीलंका से 1997 के बाद पहली बार वनडे सीरीज गंवाई, न्यूजीलैंड से 1988 के बाद घरेलू टेस्ट हारी, बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी 2015 के बाद खोई और पहली बार वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल से बाहर रहा। ये आंकड़े बताते हैं कि यह दौर जितना चर्चा में रहा, उतना ही विवादों और आलोचनाओं से भी घिरा रहा।
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