Putrada Ekadashi:- पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इस व्रत को संतान प्राप्ति और समृद्धि के लिए रखा जाता है। पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है। इस व्रत को विधि विधान और श्रद्धा के साथ करने से धन धान्य और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इस व्रत को रखने से उत्तम और स्वस्थ संतान की प्राप्ति होती है। हिंदू धर्म में से बड़े ही श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है। पुत्रदा एकादशी साल 2025 की सबसे आखरी एकादशी है। आइए इसका व्रत कब किया जाएगा। इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
पुत्रदा एकादशी कब हैं?
पुत्रदा एकादशी को 30 दिसंबर को मनाई जाएगी। इस एकादशी की शुरुआत सुबह 6:38 से होगी। वहीं इसका समापन 31 दिसंबर को 4:48 पर होगा। पुत्रदा एकादशी का व्रत 30 दिसंबर को रखा जाएगा। संतान प्राप्ति के लिए शास्त्रों के मुताबिक यह एकादशी सर्वोत्तम मानी जाती है।
पुत्रदा एकादशी का हिंदू धर्म में महत्व
पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान प्राप्ति के लिए रखा जाता है। इस व्रत का हिंदू धर्म में बहुत ही खास महत्व है। इस एकादशी को लोग बहुत ही श्रद्धा और भाव के साथ मनाते हैं। इससे अच्छी और उत्तम संतान प्राप्त होती है। इस व्रत को रखने से खुशहाली और समृद्धि बनी रहती है धन-धान्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
पुत्रदा एकादशी की पूजा कैसे करें?
पुत्रदा एकादशी की पूजा की विधि बहुत ही आसान है। इसे बड़े ही आसानी के साथ किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले आपको व्रत के दिन सुबह उठकर स्नान करके पीले वस्त्र धारण करने होंगे। इसके बाद लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बेचकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के प्रतिमा को स्थापित कर दें।
इसके बाद पंचामृत से इनको स्नान कर दे और पीले वस्त्र धारण इसके बाद धूप दीप माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु को अर्पित करें। भगवान विष्णु को पीली मिठाई का भोग लगे इसके बाद एकादशी कथा का वाचन करें अंत में पूजा के बाद परिवार और सभी को प्रसाद अर्पित कर दे। इस प्रकार आप इस पूजा को संपन्न कर सकते हैं।
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