CG News : छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को लेकर बड़ा खुलासा हुआ। रायपुर पश्चिम से विधायक राजेश मूणत के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लिखित जानकारी पेश की। इसमें बताया गया कि बीते तीन वर्षों में ईडी ने राज्य के सात वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई की है, जिनमें से दो अभी भी जेल में हैं, जबकि पांच अधिकारी फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। विधानसभा में सामने आए इन आंकड़ों के बाद एक बार फिर ईडी की कार्रवाई और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
विपक्ष जहां इसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों से जोड़कर देख रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि नियमों के तहत हर मामले में वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया है। बता दें कि सरकार की ओर से इन मामलों में निलंबन, अभियोजन स्वीकृति और जांच की अनुमति जैसी प्रक्रियाएं अपनाई गई हैं, जिससे जनता को सीधे तौर पर लाभ मिला है।
CG News : अनिल टुटेजा
मुख्यमंत्री के लिखित जवाब के मुताबिक, यह कार्रवाई कैलेंडर वर्ष 2023, 2024 और 2025 के दौरान की गई। इनमें आईएएस, राज्य प्रशासनिक सेवा और विभागीय शीर्ष पदों पर रहे अधिकारी शामिल हैं। वाणिज्य व उद्योग विभाग के तत्कालीन संयुक्त सचिव अनिल टुटेजा के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति दी गई थी। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस स्वीकृति के बाद उनके विरुद्ध कार्रवाई हुई और वर्तमान में वे जेल में बंद हैं। वहीं, अब यह मामला सरकार के जवाब में सबसे गंभीर कार्रवाई के रूप में सामने आया।
रानू साहू
तत्कालीन कोरबा कलेक्टर आईएएस रानू साहू को ईडी की कार्रवाई के बाद जेल भेजा गया था। इसके बाद राज्य सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया। हालांकि, वर्तमान समय में वे जमानत पर बाहर हैं। यह मामला प्रशासनिक हलकों में लंबे समय तक चर्चा में रहा।
समीर विश्नोई
भू-विज्ञान एवं खनिज विभाग के तत्कालीन निदेशक आईएएस समीर विश्नोई के खिलाफ सामान्य प्रशासन विभाग ने आरोप पत्र जारी किया है। इसके साथ ही ईडी की कार्रवाई के चलते उन्हें जेल भेजे जाने के बाद निलंबित भी किया गया। यह मामला खनिज से जुड़े मामलों में हुई जांच से जुड़ा है।
निरंजन दास
आबकारी विभाग के तत्कालीन आयुक्त निरंजन दास के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई। उन्हें जेल भेजा गया है और वे फिलहाल वहीं बंद हैं। सरकार ने उनके विरुद्ध अभियोग पत्र प्रस्तुत करने के लिए विधि एवं विधायी कार्य विभाग से अनुमति मांगी है।
जेपी मौर्य
भौमिक एवं खनिकर्म विभाग के तत्कालीन संचालक जेपी मौर्य के मामले में अभी जांच जारी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने उन्हें संदेही अधिकारी मानते हुए एसीबी और ईओडब्ल्यू को जांच की अनुमति दी है। इस स्तर पर उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।
आज विधानसभा सत्र में सम्मिलित रहूंगा। pic.twitter.com/KKZPztA22h
— Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) December 15, 2025
सौम्या चौरसिया
राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी और मुख्यमंत्री कार्यालय की तत्कालीन उपसचिव सौम्या चौरसिया के खिलाफ ईडी की प्रेस विज्ञप्ति को संज्ञान में लेकर निलंबन की कार्रवाई की गई। विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने उनके विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति दे दी है। फिलहाल वे जमानत पर हैं।
भरोसा राम ठाकुर
तत्कालीन संयुक्त कलेक्टर भरोसा राम ठाकुर को भी सामान्य प्रशासन विभाग ने निलंबित किया है। उनके विरुद्ध भी विधि एवं विधायी कार्य विभाग से अभियोजन की स्वीकृति दी गई है। वर्तमान समय में वे जमानत पर बाहर हैं।
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