CG News : छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड से शनिवार को बड़ी खबर सामने आई। चौरभाठा गांव के सरकारी पूर्व माध्यमिक स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के लिए स्कूल का खाना बीमारी की वजह बन गया। दोपहर का भोजन खाने के कुछ ही देर बाद 25 बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। किसी को उल्टियां होने लगीं तो किसी को तेज दस्त होने लही। देखते ही देखते स्कूल में हड़कंप मच गया।
बता दें कि घटना शनिवार यानी 13 दिसंबर की है। रोज की तरह स्कूल में मध्याह्न भोजन बांटा गया था। इस दिन बच्चों को खीर और पूड़ी दी गई। खाना बनाकर लाने की जिम्मेदारी राहुल स्वसहायता समूह की थी। बच्चों ने जैसे ही खाना खाया, कुछ ही मिनटों में उन्हें पेट दर्द और जी मिचलाने की शिकायत शुरू हो गई। कई बच्चे क्लास में ही सुस्त हो गए थे।
CG: इलाज जारी
नियमों के मुताबिक, स्कूल में खाना परोसने से पहले शिक्षकों को उसकी गुणवत्ता जांचनी होती है। बताया जा रहा है कि उस दिन बिना किसी जांच के खाना सीधे बच्चों को दे दिया गया। यही लापरवाही भारी पड़ गई। जब एक के बाद एक बच्चे बीमार होने लगे, तो शिक्षकों और स्कूल स्टाफ ने तुरंत बच्चों के परिजनों को सूचना दी। हालात बिगड़ते देख बच्चों को नवागढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। अस्पताल पहुंचते-पहुंचते चार बच्चों की हालत ज्यादा खराब हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें निगरानी में रखा है, बाकी बच्चों की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। फिसलहाल, उनका इलाज चल रहा है।
CG: पहले भी उठ चुके थे सवाल
अस्पताल में भर्ती बच्चों से बातचीत में एक और गंभीर बात सामने आई। बच्चों ने बताया कि पहले भी इसी स्वसहायता समूह के खाने की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें की जा चुकी हैं। कई बार खाने का स्वाद खराब होने और पेट दर्द की बातें घर में बताई गई थीं। कुछ बच्चों ने स्कूल में भी इस बारे में कहा था, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। इस घटना के बाद अभिभावकों का आरोप है कि अगर पहले की शिकायतों को गंभीरता से लिया गया होता, तो शायद आज यह नौबत नहीं आती। बच्चों की सेहत से जुड़ा मामला होने के बावजूद व्यवस्था में कोई सुधार नहीं किया गया, जिसका नतीजा आज सबके सामने है।
CG: अधिकारियों ने लिया जायजा
घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग में हलचल मच गई। ब्लॉक मेडिकल अधिकारी ने बताया कि चार बच्चों की हालत नाजुक है, लेकिन बाकी खतरे से बाहर हैं। सभी बच्चों पर डॉक्टरों की टीम नजर बनाए हुए है। इलाके के विधायक ने भी मामले को गंभीरता से लिया और फोन पर स्वास्थ्य अधिकारियों से बात कर बच्चों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए। जिला शिक्षा अधिकारी खुद अस्पताल पहुंचे और बच्चों की हालत देखी।
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