Indore Ranjit Ashtami : इंदौर शहर की पहचान बन चुकी रणजीत अष्टमी की प्रभातफेरी ने शुक्रवार को एक बार फिर साबित कर दिया कि इंदौर की भक्ति का रंग कभी फीका नहीं पड़ता। सुबह-सुबह की कड़ाके की ठंड भी लोगों के जोश को रोक नहीं सकी। जैसे ही प्रभातफेरी आगे बढ़ी, पूरा पश्चिम क्षेत्र मानो एक साथ बाबा रणजीत के चरणों में झुक गया। जहां भी नजर डालो, श्रद्धालुओं की भीड़, जयकारों की आवाज और संस्कृति की झलकियां दिखाई देती रहीं।
इस बार की प्रभातफेरी में झांकियां लोगों के लिए खास आकर्षण बनीं। मंचों और वाहनों पर हनुमान के कई स्वरूप बाहुबली हनुमान, पंचमुखी हनुमान, बाल हनुमान से लेकर दास हनुमान तक… ऐसा लगा मानो पूरा रामायण का संसार चल रहा हो।
Indore Ranjit Ashtami पर निकाली गई झांकियां
‘मां अंजनी की गोद में बाल हनुमान’ वाली झांकी देखने वालों की भीड़ टूट पड़ी। इसके अलावा ‘राम राज्य’ की कल्पना दर्शाने वाली झांकी भी खूब सराही गई। बाबा रणजीत के रथ को 500 लोग पारंपरिक वेश में खींच रहे थे। रथ की सजावट से लेकर रास्ते की तैयारी तक, कार्यक्रम की तैयारी रातभर चलती रही। आतिशबाजी ने माहौल को और रंगीन बना दिया। युवा तो रास्ते भर मोबाइल निकाल-निकालकर वीडियो बनाते रहे और पूरे दिन सोशल मीडिया पर ‘जय रणजीत’ की पोस्टों की बाढ़ सी आई रही।
प्रसाद का इंदौरी अंदाज
रास्ते भर करीब 100 मंचों से प्रसाद और खाद्य सामग्री बांटी जा रही थी। पोहे-जलेबी से शुरुआत हुई तो फिर इंदौर का पूरा स्वाद ही भक्तों के सामने परोस दिया गया। आलूबड़े, समोसे, कचोरी, मठरी, बिस्किट, नुक्ती, हलवा… लोगों के सामने विकल्प इतने थे कि कोई समझ नहीं पा रहा था कि खाए क्या और घर ले जाए क्या। इसके अलावा, संतरा, सेवफल और शीतल पेय का वितरण भी लगातार चलता रहा। किसी मंच पर तोपों से फूल बरसाए जा रहे थे, तो किसी पर बच्चों और युवाओं ने देवी-देवताओं के वेश में स्वागत किया।
बाहरी राज्य से आए लोग
प्रभातफेरी में पिछले 15 साल से शामिल होने वाले विनय शर्मा इस बार अपने बेंगलुरु वाले मित्र संदीप मौर्य को साथ लाए। संदीप ने कहा कि विनय से सालों से इसकी कहानियां सुनता था, इस बार छुट्टी लेकर खुद देखने आ गया। उसका कहना था कि सुबह की ठंड में भी इतने अनुशासित और खुश लोग एक साथ चल रहे थे, यह नजारा मिस नहीं किया जा सकता। इस बार एक नई परंपरा की शुरुआत भी हुई। पुलिस प्रशासन के बैंड ने बाबा रणजीत हनुमान को सलामी दी और रामधुन बजाई। इससे माहौल और भी दिव्य हो गया। सांसद सेवा संकल्प द्वारा बनाए गए मंच पर अयोध्या राम मंदिर की कलाकृतियों की सजावट लोगों को खूब भाती रही।
संख्या लाख के पार
ड्रोन से गंगाजल और मोगरे के इत्र का छिड़काव किया गया, जिससे पूरा मार्ग सुगंध से भर गया। ऐसा लगा मानो आध्यात्मिकता हवा में घुल गई हो। भक्तमंडल के मुताबिक, इस बार भीड़ ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। 2024 में साढ़े 3 लाख और 2025 में 5 लाख लोग आए थे, जबकि इस बार अनुमान है कि संख्या 6 लाख के पार पहुंच गई।
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