Ujjain News : उज्जैन का महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग हमेशा से आस्था का सबसे बड़ा केंद्र रहा है। यहां रोजाना हजारों भक्त बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचते हैं और अपनी भावनाओं के साथ तरह-तरह की फूलमालाएं अर्पित करते हैं, लेकिन अब मंदिर प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लेते हुए यह साफ कर दिया है कि 1 जनवरी से शिवलिंग पर 10 किलो या उससे भारी माला चढ़ाने की अनुमति नहीं होगी। यह नियम भस्मआरती से लेकर शयन आरती तक हर समय लागू रहेगा।
मंदिर प्रबंधन ने इस फैसले के पीछे कई महत्वपूर्ण वजहें बताई हैं। महाकाल का ज्योतिर्लिंग स्वयंभू माना जाता है, जो कि बहुत ही संवेदनशील स्वरूप है। भारी वजन वाली मालाएं ज्योतिर्लिंग पर दबाव डालती हैं। साथ ही उनसे नमी भी बढ़ती है, जिससे शिवलिंग को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।
Ujjain: इसलिए लिया फैसला
इसके अलावा, बड़ी मालाओं में फूलों की बर्बादी भी काफी देखने में आ रही थी। जैसे ही आरती खत्म होती थी, मोटी-मोटी मालाएं उतारी जाती थीं और तुरंत हटानी पड़ती थीं। इससे सफाई में दिक्कत होती थी और गर्भगृह में व्यवस्था संभालना मुश्किल हो जाता था। प्रशासन का कहना है कि ये सब लंबे समय से परेशान कर रहा था, इसलिए नियम बदलना जरूरी हो गया था। यह कदम भक्तों की सुविधा के साथ-साथ ज्योतिर्लिंग की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी था। जैसे-जैसे भक्तों की संख्या बढ़ती जा रही है, गर्भगृह में व्यवस्था बनाए रखना चुनौती बनता जा रहा था। अब छोटी मालाओं और हल्के फूलों से पूजा करने पर भी मंदिर की पवित्रता और गरिमा बनी रहेगी।
Ujjain: नई गाइडलाइन
नई गाइडलाइन के तहत, अब छोटे आकार की मालाएं, खुले फूल और व्यक्तिगत रूप से लाई गई छोटी पूजन सामग्री चढ़ाने की अनुमति होगी। मंदिर प्रशासन ने भक्तों से खास तौर पर यह भी कहा है कि वे ज्यादा से ज्यादा बिल्व पत्र और ताजे फल अर्पित करें। ये चीजें शिवलिंग के लिए सुरक्षित हैं और बाबा को भी अतिप्रिय मानी जाती हैं। इससे पूजा विधि सरल होगी, साथ ही गर्भगृह में साफ-सफाई भी रहेगी।
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