Vande Mataram:- वंदे मातरम देश का राष्ट्रीय गीत है जिसे लेकर पिछले कई दिनों से जोरदार बहस छिड़ी हुई है। वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था जिसको अब लगभग 150 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। वंदे मातरम को 150 साल होने के इस मौके पर संसद में बहस रखी गई थी। इसके बाद पक्ष-विपक्ष ने एक दूसरे की बातें सामने रखी। इसके बाद वंदे मातरम एक बहस का मुद्दा बन गया। वही आम जनता का कहना है कि हम देश के रहने वाले देशवासी है और हमको वंदे मातरम गाने में कोई परेशानी या दिक्कत नहीं है। इसके बाद अब विपक्ष के पास बहस करने को कोई मुद्दा नहीं रह गया है।
राष्ट्रीय गीत है वंदे मातरम
वंदे मातरम हमारा राष्ट्रीय गीत है और इस गाने में हमें कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। विशाल मालवीय का कहना है कि अगर आपको देश में रहना है तो वंदे मातरम तो कहना ही होगा। वंदे मातरम गाने में किसी को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए अब ऐसा कहने पर विपक्ष के पास ना कोई मुद्दा रह गया है और ना बहस की कोई वजह रह गई है।
विपक्ष को नहीं पता क्या है वंदे मातरम
विपक्ष के पास वंदे मातरम को लेकर एक ही मुद्दा था जो अब खत्म हो चुका है। पवन कुमार बरनवाल का कहना है कि विपक्ष को यह तक नहीं पता है कि आखिर वंदे मातरम है क्या। हम वंदे मातरम के जरिए हमारे भारत माता की वंदना करते हैं। इतना ही नहीं उमेश चंद्र गुप्ता का कहना है कि भारत को स्वतंत्र करने में इस जीत की बहुत बड़ी भूमिका रही है। इसीलिए अब यह बहस का मुद्दा नहीं है।
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