बिहार में कोरोना काल में 40% MBBS स्टूडेंट्स फेल, मार्च में हुए एग्जाम का अगस्त में आया रिजल्ट

कोरोना काल में बिहार के मेडिकल कॉलेजों में MBBS की पढ़ाई कर रहे लगभग 40 प्रतिशत स्टूडेंट्स फेल हो गए हैं। इसमें ऐसे भी स्टूडेंट्स शामिल हैं, जो टॉपर की आस लगाए थे। कोरोना काल में एग्जाम और 6 माह बाद आए रिजल्ट ने स्टूडेंट्स का आक्रोश बढ़ा दिया है। 2019 बैच के MBBS स्टूडेंट्स गलत मूल्यांकन का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है- “कोरोना काल में यह बड़ी नाइंसाफी की गई है।’ आंकड़ों के अनुसार, 1100 स्टूडेंट्स में से 480 स्टूडेंट्स फेल हो गए हैं। बिहार के अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में MBBS की पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स का कहना है- “आर्यभट्‌ट नॉलेज यूनिवर्सिटी ने एग्जाम लिया है। 2019 बैच के लगभग 200 MBBS स्टूडेंट्स ने VC से मुलाकात कर सिस्टम में सुधार की मांग की है। कोरोना काल में हर बोर्ड, हर एग्जाम लेने वाली एंजेसियों ने स्टूडेंट्स को सहूलियत दी है, लेकिन MBBS स्टूडेंट्स को सहूलियत नहीं दी गई है। AKU के VC से मांग की गई है कि सिस्टम में सुधार किया जाए, जिससे ऐसा नहीं हो कि जो मेरिट की उम्मीद लगाए बैठे हैं, वह फेल हो जाएं।’

स्टूडेंट्स का कहना है- “मूल्यांकन में गड़बड़ी के कारण मेरिट रिस्ट में फर्स्ट टॉपर और सेकेंड टॉपर में बड़ा गैप है। फर्स्ट टॉपर का अंक 675 है तो सेकेंड टॉपर का अंक 620 है। ऐसे गैप से साफ हो रहा है कि मूल्यांकन पूरा ध्यान लगाकर नहीं किया गया है। दोबारा मूल्यांकन कराया जाए, लेकिन इस पर सहमति नहीं बनी है। यूनिवर्सिटी में ऐसा नियम नहीं है।’ उनका कहना है- “MBBS का सिलेबस काफी कठिन होता है और कोरोना काल में खुद से ऑनलाइन पढ़ाई कर एग्जाम देने वाले स्टूडेंट्स का मूल्यांकन संतोषजनक नहीं होना दुखद है।’ स्टूडेंट्स का कहना है- “एग्जाम के 6 माह बाद आए रिजलट ने कई वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। अब तक ऐसा नहीं हुआ था 40 प्रतिशत स्टूडेंट्स एक साथ फेल हो जाएं।’ अब एक माह में तैयारी कर फिर से उन्हें एग्जाम पास करना होगा। इसे लेकर आक्रोश है और हंगामा चल रहा है। बिहार के अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों के स्टूडेंट्स ने यूनिवर्सिटी पहुंचकर सिस्टम में सुधार की मांग की हैं।

मेडिकल कॉलेज पावापुरी के छात्र अजय चौधरी ने बताया- “2019 बैच के छात्र हैं और सेशन पहले से ही काफी विलंब चल रहा है। विश्वविद्यालय की तरफ से एग्जाम फर्स्ट ईयर का काफी पहले लिया गया, लेकिन रिजल्ट अब जारी किया गया, जो काफी गलत है। अधिकांश छात्रों को एक और दो नंबर से फेल किया गया है।’ दरभंगा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के छात्र दीपक कुमार सिंह ने कहा- “एग्जामिनेशन से पहले मार्किंग क्राइटेरिया चेंज हुई और इस बात की जानकारी भी नहीं दी गई।’ स्टूडेंट अजय गुप्ता ने मूल्यांकन में मनमानी की बात कही है।

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