मॉब लिंचिंग के मुददे पर पहली बार बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत।

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महाराष्ट्र:महाराष्ट्र के पालघर में 2 साधुओं समेत तीन लोगों की मॉब लिंचिंग किए जाने की घटना की देशभर में कड़ी आलोचना की गई। राज्य सरकार ने इस मामले पर उच्चस्तरीय जांच के आदेश देते हुए कार्रवाई की और 9 नाबालिग समेत 110 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। लेकिन, पालघर मॉब लिंचिंग पर पहली बार राष्ट्रीय स्वंय सेवक प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को सवाल उठाया है।
मोहन भागवत ने कहा, “2 साधुओं की हत्या। क्या यह होना चहिए? क्या कानून व्यवस्था किसी एक के हाथ में लिया जाना चाहिए था? पुलिस को क्या करना चाहिए था? ये सभी चीजें ऐसी हैं जिन पर सोचा जाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि भारत के हितों की विरोधी ऐसी ताकतों के खिलाफ सतर्क रहने की जरूरत है जो स्थिति का फायदा उठाना चाहती हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि संकट की इस घड़ी में प्रभावित सभी लोगों की मदद भेदभाव के बिना की जानी चाहिए और देश के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम किया जाना चाहिए।
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसवेक संघ के कार्यकर्ताओं के नाम ऑनलाइन संबोधन में कहा, ”हमें धैर्य और शांति से काम करना होगा। कोई भय या गुस्सा नहीं होना चाहिए क्योंकि भारत विरोधी मनोवृत्ति रखनेवाले लोग इसका इस्तेमाल देश के खिलाफ कर सकते हैं।” संघ प्रमुख ने संभवत: तबलीगी जमात के लोगों से जुड़ी घटनाओं के संदर्भ में कहा कि यदि किसी ने कुछ गलत किया है तो हर किसी को अपराधी न मानें। कुछ लोग इसका दुरुपयोग करना चाहते हैं।

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