बिहार झारखंड के मजदूर बैठे धरने पर ।

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भरतपुर:राजस्थान के भरतपुर में झारखंड और बिहार के प्रवासी मजदूर उत्तर प्रदेश बॉर्डर पर शनिवार से धरने पर बैठे हुए हैं. शनिवार रात में भी वो धरने पर बैठे रहे. धरना अब भी जारी है. मजदूरों को राजस्थान से उत्तर प्रदेश की सीमा में घुसने से यूपी के अधिकारियों ने रोक दिया है.
इसके बाद सैकड़ों की तादाद में झारखंड और बिहार के प्रवासी मजदूरों ने वहीं उत्तर प्रदेश और राजस्थान बॉर्डर के बीच में ही हाईवे पर बैठकर चक्का जाम कर दिया. मजदूरों ने किसी भी आवागमन और वाहनों के संचालन को बंद कर दिया है.
बिहार और झारखंड के मजदूरों को रोका।मजदूरों का कहना है कि राजस्थान से निकलकर वह उत्तर प्रदेश होते हुए बिहार और झारखंड जाना चाह रहे हैं. लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें वहीं रोक दिया और अपनी सीमा में अंदर घुसने की अनुमति नहीं दे रही है. जबकि उत्तर प्रदेश के मजदूरों को जाने दिया गया. लेकिन बिहार और झारखंड के मजदूरों को उत्तर प्रदेश सरकार अपनी सीमा में नहीं घुसने दे रही है. इससे सभी मजदूर बेबस और लाचार हैं,
झारखंड के एक मजदूर ने कहा कि हम लोग लॉकडाउन में फंस गए थे. यहीं राजस्थान में रहकर मजदूरी करते थे. लेकिन अब खाने पीने को कुछ नहीं है और बेरोजगार भी हो गए हैं. इसलिए पैदल-पैदल हजारों किलोमीटर चलते हुए आज राजस्थान को पार करते हुए उत्तर प्रदेश सीमा में घुस रहे थे. लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने हमको सीमा के अंदर घुसने नहीं दिया. इसलिए बिहार और झारखंड के हम सैकड़ों मजदूर यहीं बॉर्डर पर धरने पर बैठे हुए हैं.
दरअसल, झारखंड और बिहार के करीब डेढ़ सौ मजदूर राजस्थान में रहकर मजदूरी करते थे. लेकिन कोरोना लॉकडाउन के चलते वो फंस गए. बेरोजगार और खाने पीने के सामान की किल्लत होने की वजह से ये सभी मजदूर हजारों किलोमीटर पैदल चलते हुए राजस्थान के अंतिम बॉर्डर भरतपुर जिले में पहुंचे, जहां से वह उत्तर प्रदेश सीमा में घुसना चाह रहे थे. लेकिन तभी उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी सीमा में इन मजदूरों को घुसने देने से मना कर दिया.
इन मजदूरों ने आरोप लगाया है कि उनके राज्यों की सरकारें उनको अपने राज्य लौटने के लिए किसी भी प्रकार का साधन मुहैया नहीं करा रही हैं. राजस्थान से पैदल चलते-चलते वह अपने झारखंड और बिहार राज्यों को जा रहे हैं. लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार उनको घुसने देने से मना कर रही है. अब इस स्थिति में सैकड़ों की तादाद में झारखंड और बिहार के मजदूर आखिर कहां जाएं.

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