प्रधानमंत्री ने जारी किया राहत पैकेज ।

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नई दिल्ली:पीएम मोदी ने मगंलवार को आर्थिक पैकेज का ऐलान करते हुए कहा था कि इसमें किसानों, मजदूरों, मिडिल क्लास, इंडस्ट्री, सबके लिए कुछ ना कुछ है। वित्त मंत्री निर्मला सीतरमण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह जानकारी दी कि इस आर्थिक पैकेज में किस सेक्टर के लिए क्या पैकेज है।
अभी हालात ये हैं कि सभी की सैलरी कट रही है, चाहे वह निजी कंपनी में नौकरी करता है या फिर सरकारी कंपनी में। सरकारी कंपनी में तो कटौती काफी कम है और सरकारी नौकरी वाले लोग भी महज 1.5 से 2 फीसदी हैं। उनकी तुलना में निजी कंपनियों में काम करने वालों की संख्या बहुत अधिक है, जहां पर 25-30 फीसदी तक की सैलरी कटौती भी हो रही है।
टैक्स पेयर्स को राहत देने के लिए सरकार का सबसे बड़ा हथियार तो टैक्स छूट ही होता है। वैसे भी कोरोना की वजह से पहले ही लोगों की सैलरी कट रही हैं और लोग नौकरी खो रहे हैं, ऐसे में यही एक तरीका है उनकी जेब में कुछ पैसे बचाने का,
मिडिल क्लास को इस बार 20 लाख करोड़ के पैकेज के तहत टैक्स में छूट मिल सकती है। ऐसे कयास इसलिए लगाए जा रहे हैं, क्योंकि पीएम मोदी ने सीधे-सीधे टैक्स पेयर्स की बात की है, ना कि पूरे मिडिल क्लास की।
कोरोना के चलते पहले तो गेहूं की कटाई के लिए लेबर नहीं मिली और जैसे-तैसे लेबर मिली भी, तो गेहूं से लदी ट्रैक्टर ट्रॉलियां मंडी में खड़ी रहीं। इसी बीच आंधी-तूफान-बारिश ने हालात को बद से बदतर बना दिया। मोदी सरकार अपने इस पैकेज में किसानों के लिए कर्जमाफी या अतिरिक्त डायरेक्ट पैसे ट्रांसफर कर सकती है, जिससे अन्नदाता के चहरे पर खुशहाली आ सके।
एक ओर कोरोना की वजह से पॉल्ट्री फार्म का बिजनेस तबाह हो गया, मछली पालन में सिर्फ नुकसान हो रहा है, वहीं बारिश और ओलों ने बची-खुसी कसर पूरी कर दी और फसलें तबाह कर दीं। कोरोना की वजह से सब्जियों की मांग भी घटी है। सब्जियों को मंडियों तक नहीं पहुंचा पाने की चलते भी कई जगहों पर तो किसानों को अपने गोभी-टमाटर की खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाना पड़ा है।
मोदी सरकार किसानों को कभी नहीं भूलती, वह अन्नदाता जो है। लेकिन किसान पर कोरोना की मार के अलावा भी उसे तमाम चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है।
माना जा रहा है कि मोदी सरकार के इस 20 लाख करोड़ के खास पैकेज में सबसे अधिक ध्यान एमएसएमई का ही रखा गया है। इस सेक्टर में सबसे अधिक रोजगार पैदा होता है। यह भी ध्यान रखने की बात है कि बहुत सारे एमएसएमई तो पंजीकृत भी नहीं हैं, जिनके रोजगार का आंकड़ा भी मौजूद नहीं होता। लॉकडाउन की वजह से सब कुछ बंद है, जिसके चलते इकोनॉमी की रफ्तार थम सी गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना संकट के बीच चौथी बार राष्ट्र के नाम संबोधन में ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ का ऐलान करते हुए कहा कि सरकार इसके लिए 20 लाख करोड़ रुपये का पैकेज ला रही है।

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