प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना हुआ साकार।

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नई दिल्ली: नेपाल ने भारत की ओर से कैलाश मानसरोवर के लिए लिंक रोड के उद्घाटन का विरोध किया है और कहा है कि यह कदम दोनों देशों के बीच समझ के खिलाफ है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को पिथौरागढ़-धारचूला से लिपुलेख को जोड़ने वाली सड़क का वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए उद्घाटन किया. इस दौरान राजनाथ सिंह ने कहा था कि कैलाश-मानसरोवर जाने वाले तीर्थयात्री अब तीन सप्ताह के बजाय एक सप्ताह में अपनी यात्रा पूरी कर सकेंगे. यह लिंक रोड घियाबागढ़ से निकलती है और लिपुलेख पास, कैलाश-मानसरोवर के प्रवेश द्वार पर समाप्त होती है.
नेपाल ने भारत से उसकी सीमा के अंदर कोई भी गतिविधि नहीं करने के लिए कहा है. नेपाल के विदेश मंत्रालय का कहना है कि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को कूटनीतिक तरीके से निपटाया जाएगा. नेपाल के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि नेपाल सरकार को पता चला है कि भारत ने शुक्रवार को लिपुलेख को जोड़ने वाली लिंक रोड का उद्घाटन किया है जो नेपाल से होकर गुजरती है.
नेपाल ने कहा कि उसने हमेशा यह साफ किया है कि सुगौली समझौते (1816) के तहत काली नदी के पूर्व का इलाका, लिंपियादुरा, कालापानी और लिपुलेख नेपाल का है. उसका कहना है कि नेपाल सरकार ने कई बार पहले और हाल में भी कूटनीतिक तरीके से भारत सरकार को नया राजनीतिक नक्शा जारी करने के बारे में बताया था
नेपाल ने इस कदम को एकपक्षीय बताया है. उसने कहा कि यह दोनों देश बातचीत और सहमति से सीमा विवाद को निपटाना चाहिए, भारत का ये कदम समझ के खिलाफ है. नेपाल का दावा है कि वह ऐतिहासिक समझौतों, दस्तावेजों, तथ्यों और नक्शों की बदौलत इसे सुलझाना चाहता है. बता दें कि इस सड़क का निर्माण 2008 में शुरू हुआ था और 2013 में पूरा होने वाला था, लेकिन नाजंग से बूंदी गांव के बीच के हिस्से में सख्त इलाके के कारण इस काम में देरी हो गई.

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