एक जेलर जिसपर देश गर्व करता है,जिसने दामनी गैंगरेप के आरोपियों में ख़ौफ़ पैदा कर दिया।

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नई दिल्ली /सुधीर गांधी :कहते हैं कोई अच्छा गुरु मिल जाये तो कुछ भी नामुकिन नही होता है आपकी लगन विश्वास मेहनत ही आपको महान बनाती है सालों मेहनत करने और डाइट फॉलो करने के बाद ही फिटनेस हासिल हो पाती है । दिल्ली पुलिस की भागदौड़ भरी जिंदगी और बिजी लाइफ स्टाइल के बीच वर्कआउट व डाइट फॉलो करने के लिए समय निकाल पाना बड़ा चैलेंजिंग काम है।
यदि आपकी ड्यूटी जेलर या जेल की गतिविधियों के लिए लगाई गई हो जहां देश के खूंखार अपराधियो की निगरानी का जिम्मा सौपा गया हो ऐसे में फिटनेस मेंटेन कर पाना और भी मुश्किल हो जाता है। इसका जीता-जागता उदाहरण हैं जेलर दीपक शर्मा है जिन्होंने ने ये करशिमा कर दिखाया है ,
दीपक शर्मा कई बार फिटनेस को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं इनको बड़ी ही गंभीर जिम्मेदारी सौपी गई है
जेल प्रशासन की तरफ से दिल्ली की मंडोली जेल के डिप्टी जेल सुपरिटेंडेंट दीपक शर्मा को निर्भया के दोषियों को फांसी देने के समय खासतौर पर तिहाड़ जेल में नियुक्त किया गया था क्योंकि दिल्ली पुलिस के बड़े अफसरों के विश्वास पात्र अफसरों में से एक है दीपक शर्मा ।

सुपरिटेंडेंट दीपक शर्मा मूल रूप से दिल्ली के यमुना विहार के रहने वाले हैं। वह  साल 2009 में पुलिस में भर्ती हुए थे, उस समय वह काफी दुबले पतलेथे। साल 2010 में सलमान खान स्टारर फिल्म दबंग रिलीज हुई।इस फिल्म को देखकर उनके अंदर नया जोश भर दिया और उन्होंने अपना वजन बढ़ाने की ठान ली। उसके बाद उन्होंने डाइट फॉलो करना और वर्कआउट करना शुरू कर दिया।

दीपक शर्मा ने 2014 से प्रोफेशनल बॉडी बिल्डर के रूप में करियर की भी शुरुआत कर दी और डिपार्टमेंट के लिए कई मेडल जीते। वह मिस्टर यूपी, मिस्टर हरियाणा, मिस्टर दिल्ली, आयरन मैन ऑफ दिल्ली (सिल्वर), स्टील मैन ऑफ इंडिया (सिल्वर मेडल) जैसे कई खिताब जीत चुके हैंजो वाकई में दिल्ली पुलिस के लिए नाज है दीपक शर्मा।
वो बताते हैं कि डिपार्टमेंट में कई फिटनेस फ्रीक लोग हैं। उज्जैन के SSP सचिन अतुलकर (SSP Sachin Kumar Atulkar) और रूबल धनकर (Rubal Dhankar) की पर्सनैलिटी को देखकर हर कोई मोटिवेट होता है।

हमने अपने शरीर के फिटनेश को समय देना शुरू कर दिया ,शुरुआती दिनों में मेरा वेट 60 किलो था। इसके बाद बढ़कर यह 118 किलो हो गया। लेकिन अब मेरा वजन 90 किलो के आसपास ही रहता है। इसलिए मैं यही कहना चाहूंगा कि इंसान को मोटिवेशन के लिए दूर जाने की जरूरत नहीं होती। मोटिवेशन हमारे आसपास ही मिल जाता हैआप कोशिश करके देखें ,अपने व्यस्थ जीवन में समय जरूर निकाले।
निर्भया गैंगरेप के आरोपियों के सवाल पर कहते हैं कि ।
निर्भया गैंगरेप के आरोपियों को फांसी के फंदे तक ले जाने के लिए ऐसे ऑफिसर्स की तलाश थी, जो मौका पड़ने पर उन चारों को संभाल सके। इस कारण यह जिम्मेदारी मुझे सौंपी गई।मैं बिना नींद लिए 72 घण्टो तक आरोपियों की बैरक के सामने यानी 1 मीटर दूरी पर बैठा था। इस दौरान मैं वहां से हिला तक नहीं और न ही सोया। यह मेरे लिए काफी बड़ी जिम्मेदारी थी ।

इस बड़ी जिम्मेदारी मिलने के लिए फिटनेस ने ही मेरा नाम आगे बढ़ाया था। मुझे लगता है कि फिटनेस हर किसी को एक कदम आगे बढ़ा देती है। इसलिए हर किसी को अपनी फिटनेस और डाइट का ख्याल रखना चाहिए।

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