किशानों को मिला महागठबंधन का समर्थन

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कृषि बिल को लेकर पुरे देश भर में उग्र आंदोलन किए जा रहे हैं। बता दे पुरे पंजाब, दिल्ली और हरयाणा समेत कई राज्यों में किसानों का आंदोलन जारी है तो वहीँ अब पटना की भी सडकों पर इसका असर देखने को मिल सकता है। 2 दिसंबर को पटना सहित पूरे बिहार में कृषि कानूनों के विरोध में विपक्ष सड़क पर होगा। कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन को राजद ने समर्थन का ऐलान कर दिया है। पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और समर्थकों को 2 दिसंबर को प्रस्तावित देशव्यापी प्रतिरोध दिवस को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने की अपील की है। इस आंदोलन में पार्टी ने सक्रिय भागीदारी का निर्णय लिया है।

माले ने भी समर्थन का किया है ऐलान

भाकपा-माले ने भी अपने राज्य स्थायी समिति की बैठक में प्रतिरोध मार्च निकालने का निर्णय लिया है। माले ने कहा कि वो कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसानों के प्रदर्शन को बिहार के कोने-कोने तक पहुंचाने का काम करेगी। बुधवार को होनेवाले प्रदर्शन में माले के महासचिव सहित सभी महत्वपूर्ण नेता सड़कों पर उतरेंगे।

आम जनजीवन पर क्या होगा असर

इस आंदोलन का राजधानी पटना में कुछ असर देखने को मिल सकता है। दोपहर 12 बजे माले नेता पटना जंक्शन स्थित बुद्ध पार्क से प्रतिरोध मार्च निकालेंगे। यह मार्च डाकबंगला चौराहा तक जायेगा। इसमें दीपांकर भट्टाचार्य समेत पार्टी के बड़े नेता शामिल होंगे। माले नेताओं का कहना है इस दौरान किसी तरह का बंद नहीं कराया जाएगा। दुकानों, ट्रैफिक को प्रभावित नहीं किया जाएगा। इसी तरह बिहार के सभी जिलों में भी मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन होगा।

आंदोलन पर क्या कह रहा राजद

राजद ने वर्तमान नीतीश सरकार को डबल ईंजन की सरकार बताते हुए किसानों के खिलाफ हो रहे षड्यंत्र में जदयू के शामिल होने के आरोप लगाएं हैं। पार्टी का कहना है कि नीतीश सरकार ने बिहार में 2006 से ही एपीएमसी बंद कर दिया है। इस वजह से बिहार में कुल खाद्यान खरीद के लक्ष्य का 1 प्रतिशत भी खरीद नहीं हो सका। बिहार के किसानों की स्थिति काफी बदतर हो गई है। किसान खेती छोड़कर बड़ी संख्या में रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।

कृषि कानून पर क्या बोले थे सीएम

कृषि कानूनों पर मचे हंगामे के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 30 नवंबर को पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया था। उन्होंने कहा था कि केन्द्र की सरकार की तरफ से कहा जा रहा है कि हमलोग किसानों से बातचीत करना चाहते हैं। जब बातचीत हो जाएगी, तब सही मायने में किसानों को ये जानकारी मिल जाएगी कि उनके फसल के प्रोक्योरमेंट में कोई बाधा नहीं आनेवाली ह

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