जदयू होगा और मजबूत, रालोसपा का जदयू में विलय जल्द

भले ही बिहार में इस वक्त नीतीश कुमार की सरकार है, लेकिन अभी हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी पार्टी का प्रर्दशन अच्छा नहीं रहा,जिसके बाद से लगातार नीतीश कुमार ऐड़ी चोटी का जोड़ लगा रहा हैं, कि वो अपनी सगंठन को मजबूत बना सके। इसी कड़ी में उपेंद्र कुशवाह की पार्टी रालोसपा का जल्द ही जदयू में विलय हो सकता है। हालाकिं, अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस तो आने वाले दो हफ्तों में रालोसपा जदयू में शामिल हो सकती है। जिसका परिणामस्वरूप एक बार फिर से नीतीश कुमार की पार्टी ओबीसी मतदाताओं- खासकर कोरी और कुर्मी जाति में में फिर वही पकड़ बना पाएगी, जो पहले होती थी। सूत्रों की मानें तो उपेंद्र कुशवाहा को जदयू में बड़ा पद दिया जा सकता है।

आपको बता दें,उपेंद्र कुशवाहा और जदयू के दिग्गज नेता बशिष्ठ नारायण सिंह की मुलाकात कई बार हो चुकी है।कयास लगाए जा रहे थे कि जल्द ही रालोसपा का विलय नीतीश कुमार की पार्टी में हो सकती है। बताया जा रहा है कि बशिष्ठ नारायण सिंह नीतीश कुमार और उपेंद्र कुशवाहा के बीच संवाद का मुख्य माध्यम थे।

अगर हम उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का गठन 2013 में किया गया था और पार्टी ने 2014 में लोकसभा चुनाव में एनडीए के घटक के रूप में लड़ी गई तीनों लोकसभा सीटें जीती थीं लेकिन पार्टी ने साल 2019 के लोकसभा चुनावों में राजद के सहयोगी के रूप में चुनाव लड़ा। साल 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में रालोसपा भले ही कोई भी विधानसभा सीट न जीत पाई हो लेकिन उसने खगड़िया, बेगूसराय, सारण, वैशाली, गया और आरा में कम से कम 10-15 सीटों पर जदयू की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाया। यह 30-विषम सीटों में 5,000 से लगभग 40,000 वोट पाने में सफल रही। आपको बता दें कि साल 2020 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू महज 43 सीट जीत सकी थी। हालाकिं, बिहार में सबसे ज्यादा सीटें राजद और फिर भाजपा ने जीती थीं।

आपको बताते चलें, पूरे बिहार विधानसभा चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश कुमार को लेकर बगावती देवर बरते थे। उनकी पार्टी ने जमकर नीतीश कुमार की आलोचना की थी, लेकिन यह भी कहना सही ही है कि राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है। बाहारहा, ये देखना होगा उपेंद्र कुशवाहा और नीतीश कुमार एक साथ मिल कर जदयू के कितना मजबूत बना पाते हैं।

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