दो उद्यमी बिहार में कर रहे कमाल, हर ब्लॉक में खोलना चाहते हैं दवाखाना

“कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछाल कर देखो यारो” ये पक्तियाँ दुष्यंत कुमार ने कही थी। इसका मतलब है कोई भी काम इस दुनिया में कठिन नहीं होता, बस उसके लिए खुद के अंदर जज्बा होने की जरुरत होती है। ये पक्तियाँ ब्लू मेडिक्स के मालिक पर बिल्कुल सटीक बैठ रही है। वो इसलिए क्योकिं 2017 में आज़म रइस ने हर ब्लौक में एक दवा दुकान खोलने का सपना देखा था। हजार परेशानियों के बाद उन्होंने ने अब तक 12 दवाईयों की दुकान खोल ली है और 534 दुकानों को खोलने का लक्क्ष रखते हैं।

साल 2017 में आज़म रईस विदेश के पेट्रोलियम इंडस्ट्री में काम किया करते थे और उनकी माँ बिहार के नवादा जिले में रहती थी। दरअसल, माँ एक मधुमेह की मरीज़ थी और उनको दवाई मिलने में काफी ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। कभी दवाई एक्सपायरी मिल जाया करती थी तो कभी दवाई समय पर नहीं पहुँच पाती थी। जिस वजह से आज़म को दवाई की दुकान खोलने की प्रेरणा मिली। आज़म ने वापस आकर देखा तो उनको बिहार के मेडिकल इंडस्ट्री में कई तरह की व्यवसाय के अवसर दिखें। उन्होंने जब इस पर खोजबीन की तब देखा की उस वक्त बिहार में 8500 करोड़ दवाईयों की ब्रिकी होती है।

नवादावासियों को कई बार गंभीर बीमारियों की दवाओं के लिए शहर से बाहर जाना पड़ता था। किसी स्टोर पे सीमित दवाएं मिलती थी तो कहीं मरीजों को नकली दवाएं दे दी जाती थीं। इसे देखते हुए आज़म के मन में एक दवा दुकान का विचार आया। जब उन्होंने काफी खोजबीन की उस दौरान उनको बिहार में कई सारी व्यवसाय के अवसर मिले। लेकिन उनको ऐसी दुकान खोलने थी जहाँ सभी दवा सरलता से कम दाम में उपलब्ध हो सके। जब इसके बारे में खोजबीन शुरू की तो उन्हें एक रिटेल फार्मेसी समूह शुरु करने की प्ररेणा मिली।

आज़म ने बिसनेस मॉडल को तैयार किया। उन्होंने फिर अपने दोस्त संजय चौधरी के साथ मिल कर ब्लू मेडिक्स नाम की कंपनी खोली। दोनों ने मिल कर अब तक कुल 12 ब्लू मेडिक्स की स्टोर खोल ली है और मार्च 2021 तक दोनों 80 स्टोर खोलने जा रहे हैं। आपको बता दें,आज़म राइस और सजंय चौधरी कुल 534 ब्लू मेडिक्स की फ्रेंचाइजी खोलने का लक्क्ष रखते हैं।

ब्लू मेडिक्स के अर्तंगत अगर कोई भी रिटेलर दवाई की दुकान खोलता है तो सबसे पहले उसपर से एक्सपायरी का बोझ हट जाएगा, क्योकिं दवाईयां वापस सभी स्टोर से ब्लू मेडिक्स चेन के सेंट्रल हाउस से मैनेज कर दी जाती हैं। जिससे एक्सपायर्ड दवाओं को आसानी से नए दवाओं से बदल दिया जाता है और खराब हुई दवाओं के खर्च का बोझ दुकानदार पर नहीं पड़ता। दूसरा सबसे बड़ा फायदा है दवाओंं का सही समय पर स्टोर पहुँचना। इसको ब्लू मेडिक्स आसानी से सुलझा देता है।

आज़म का ये सपना था कि दवाइयाँ दुकानों पर लिखे कीमत से कम कीमत पर मिले और ये सुविधा भी ब्लू मेडिक्स पर उन्होंने रखी। बता दे, ब्लू मेडिक्स के हर स्टोर पर दवाओं पर 10 फीसदी की छूट दी जाती है। इससे ग्राहकों को बहुत राहत मिली। हलाकिं ई-कॉमर्स के जरिए लोगों को दवा लेने पर कुछ छूट मिला करती हैं।

“वो कहते हैं ना की कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती” आज़म रईस की ये कहानी हमें कुछ यही संदेश देती है। भले ही रास्ते में हजार काटे क्यों ना आए पर अपने निश्चय से डट कर खड़े होना ही जिंदगी है।

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