बेटा बना जान का दुश्म’न, तो इस व्यक्ति ने वसीयत में हाथी के नाम कर दी करोड़ों की जायदाद

Desk: पिछले दिनों केरल में एक गर्भवती हथिनी को अनानास में पटाखे देकर मारने की घटना ने देशभर को झकझोर कर रख दिया था। क्षेत्र की डेमोग्राफी का हवला देते हुए सोशल मीडिया पर इसे साम्प्रदायिक रंग देने का भी प्रयास किया गया था। लेकिन पटना के एक शख्स ने अपनी वसीयत में करोड़ों की जायदाद से परिवार को दरकिनार करते हुए दो पालतू हाथियों के नाम लिख दी है। उसके अनुसार एक बार उनकी ह’त्‍या की कोशिश की गई थी। तब इन हाथियों ने जान बचाई थी।

पटना के जानीपुर के अख्तर इमाम ने जानीपुर से बोधगया तक की अपनी 10 बीघा जमीन 15 साल की हथनी रानी और 20 साल के हाथी मोती के नाम लिख दी है। जमीन करोड़ों की है। अख्तर ने एक हजार के स्टांप पेपर पर हाथियों के संरक्षण व संवर्धन के लिए काम करने वाले वन्य प्राणी के ट्रस्ट एरावत को जमीन लिख दी। यह पूछे जाने पर कि जिंदा रहते ऐसा क्यों किया, उन्होंने कहा-मुझे हाथी तस्करों, हाथी के दांत व हड्डियों के तस्करों से लगातार जान मारने की धमकी मिल रही है। हाथियों का इलाज कराने के दौरान कई जिलों में जानले’वा हम’ला हो चुका है। इसलिए जमीन दोनों हाथी के नाम लिख दी। कहा अगर मैं जिंदा नहीं रह सका, तो बेजुबान जानवर के खाने की व्यवस्था कैसे होगी? जमीन पर ट्रस्ट चारा और हाथियों की जरूरत की चीज उपजाएगा।

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अख्तर इमाम हाथियों को संरक्षण देते हैं। महावत को ट्रेनिंग देते हैं कि कैसे हाथी को बिना कोई तकलीफ पहुँच नियंत्रण में रखा जाता है। किस तरह बीमार पड़ने पर उसका इलाज किया जाता है। वे अन्य राज्यों में भी जाकर हाथियों का संरक्षण देते हैं और मोती व रानी को अपने बच्चों से कम नहीं मानते। अख्तर ने कहा कि मैंने बेटे को पढ़ाया-लिखाया पर वह गलत लोगों के साथ रहकर अपराध की दुनिया में चला गया। इस कारण वह मेरा बेटा नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अख्तर ने बताया है कि बेटे ने ही अपनी प्रेमिका से दु’ष्कर्म का झूठा आरोप लगवाकर उन्हें जे’ल भेज दिया था मगर जांच में पुलिस ने आरोपों को गलत पाया। पिता का आरोप है कि बेटे मेराज ने पशु तस्करों के साथ मिलकर हाथी बेचने की भी कोशिश की थी, लेकिन वह पकड़ा गया इसलिए वसीयत के अनुसार, अगर उनसे पहले या बाद में हाथी न रहा तो भी परिवार के किसी सदस्य को एक रुपया नहीं मिलेगा।

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