जिलाधिकारी ने राज्य के पहले पालक परिवार को सौंपा बच्चा

मुजफ्फरपुर
किशोर न्याय (बालकों के देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को बाल गृहों से निकाल कर पालक (फॉस्टर) परिवार से जोड़ने का कार्य मुजफ्फरपुर में शुरू हो चुका है। इसी कड़ी में आज एक पालक अभिभावक ने बाल गृह में रह रहे एक बच्चे को फॉस्टर केयर में लिया। इस दौरान जिलाधिकारी श्री प्रणव कुमार, बाल विकास परियोजना अधिकारी, बाल कल्याण समिति एवं जिला बाल संरक्षण इकाई के सदस्य, यूनिसेफ बिहार और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन अल्टरनेटिव केयर के अधिकारी मौजूद रहे।

जिलाधिकारी श्री प्रणव कुमार ने राज्य के पहले पालक परिवार को बच्चा सौंपा। उन्होंने कहा कि यह एक अनूठी और नेक पहल है। इससे बच्चे को एक परिवार मिलता है और परिवार को बच्चा। दोनों एक-दूसरे को पूरा करते हैं। एक बच्चा जो इस दुनिया से अनजान है, उसे एक परिवार की जरूरत होती है। माता-पिता के मार्गदर्शन में बच्चा बढ़ता है और देश के विकास में अपनी भूमिका निभाता है। बच्चे हमारा भविष्य हैं और हमें उनका पूरा ध्यान रखने की जरूरत है।
सुश्री गार्गी साहा, बाल संरक्षण अधिकारी, यूनिसेफ बिहार ने कहा कि फॉस्टर केयर के तहत ऐसे बच्चों को परिवार से जोड़ा जाता है जिनके माता-पिता नहीं होते हैं या माता-पिता बच्चे की देखभाल के लिए सक्षम नहीं होते। बिहार में फॉस्टर केयर को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन अल्टरनेटिव केयर, यूनिसेफ और समाज कल्याण विभाग के सहयोग से लागू कर रही है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत अभी इसे चार जिलों – मुजफ्फरपुर, गया, पूर्णिया और अररिया में लागू किया जा रहा है।

सुश्री वसुंधरा ओम प्रेम, प्रबंध निदेशक, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन अल्टरनेटिव केयर, नई दिल्ली ने कहा कि परिवारों की पहचान समुदाय से की जाती है और उनके मानसिक-सामाजिक मूल्यांकन, पुलिस सत्यापन और चिकित्सा परीक्षण के बाद बाल कल्याण समिति से आदेश मिलने के उपरांत ही किसी बच्चे को उनके पास भेजा जाता है। पूरी प्रक्रिया एडीसीपी, जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति और बाल देखभाल संस्थान, मुजफ्फरपुर के अधिकारियों के सहयोग से की जाती है।

श्री उदय कुमार झा, सहायक निदेशक, बाल संरक्षण ने कहा कि आज जिस बच्चे को उसके पालक परिवार को सौंपा जा रहा है, वह 12 फरवरी, 2020 को मुज़फ़्फ़रपुर रेलवे स्टेशन पर रेलवे चाइल्ड लाइन को मिला था। कई प्रयासों के बाद भी डीसीपीयू को उसके माता-पिता नहीं मिले और वह बाल देखभाल संस्थान में रह रहा था। लेकिन अब पास के गाँव के ही एक निःसंतान दंपति ने इस बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी ली है जो कि बहुत सराहनीय है।

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन अल्टरनेटिव केयर की ओर से बच्चे को स्कूल बैग, पानी की बोतल, किताबें और बल्ला तथा गेंद दिया गया।

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