नए सशक्त एवं आत्म-निर्भर भारत का आगाज़ है ‘कौशल पुनरुत्थान डिजिटल विश्वविद्यालय’

भारत जैसे विकासशील देश में अक्सर यह महसूस किया गया है कि देश में ई-शासन को सुनिश्चित करने के लिए बहुत अधिक जोर देने की आवश्यकता है,जो इलेक्ट्रॉनिक सेवाओं, उत्पादों, उपकरणों,नौकरी के अवसरों और शिक्षा को शामिल करने वाले समावेशी विकास को बढ़ावा दे सके। इसी कड़ी में डिजिटल यूनिवर्सिटी ऑफ़ स्किल रिसर्जेंस देश के युवाओं और प्रशिक्षुओं में पारंपरिक ज्ञान व कौशल के प्रति आत्मविश्वास पैदा करने एवं समसामयिक अपेक्षित कौशल और आधुनिक तकनीकी समझ के अंतराल को कम करने के उदेश्य से सत्यापित एक प्रयोग है।उक्त विचार DUSR की नियंत्रक (Governor)डॉ.रिंजू राय के हैं।

डॉ.राय ने बात करते हुए हमें बताया कि कौशल पुनरुत्थान डिजिटल विश्वविद्यालय ( एक आभासी मेटा विश्वविद्यालय ) गैर सरकारी संगठन- सामाजिक विकास एवं शोध संस्था की एक इकाई है जो वर्ष 2002-03 में संस्था पंजीकरण अधिनियम 1860 के अंतर्गत पंजीकृत है। कौशल पुनरुत्थान डिजिटल विश्वविद्यालय ( Digital University of Skill Resurgence DUSR ) ऑनलाइन माध्यम से संचालित एक आभासी मेटा विश्वविद्यालय है जो युवाओं में व्यावसायिक कौशल विकसित करने , व्यावसायिक उद्यमी नागरिकों में व्याप्त कौशल को अद्यतन करने तथा भारतीय ज्ञान पद्धति , जीवन मूल्य और कौशल विकास को केंद्रीभूत करके कार्य करने के लिए संकल्पित है। कौशल पुनरुत्थान डिजिटल विश्वविद्यालय शैक्षिक तकनीक ( EdTech ) को आत्मसात करके मानव जीवन व्यवहार के सभी प्रमुख आयामों पर केंद्रित व्यावहारिक- व्यावसायिक शिक्षण प्रशिक्षण को प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

क्या हैं ‘कौशल पुनरुत्थान डिजिटल विश्वविद्यालय’के उद्देश्य-

DUSR की नियंत्रक (Governor) डॉ.रिंजू राय ने बताया है कि COVID-19 महामारी ने हम सभी को यह बता दिया है कि ‘आवश्यकता आविष्कार की जननी है’ जीवित रहने के लिए और कुछ बेहतर करने के लिए जो कुछ भी जरूरी हो जाता है तो मानव किसी भी तरह से उसे प्राप्त करने के प्रयास में जुट जाता है। आज हम सब लॉकडाउन की वज़ह से घरों में बंद हैं लेकिन इसके बावजूद हमें सूचना और ज्ञान के प्रवाह को रुकने नहीं देना है डॉ.रिंजू राय कहती हैं कि DUSR का उदेश्य शैक्षिक तकनीक ( EdTech ) की संभावनाओं का उपयोग करके अधिगम आधारित शिक्षण – प्रशिक्षण को साकार करना। युवाओं और प्रशिक्षुओं को स्वरोजगार के लिए शिक्षित- प्रशिक्षित और प्रोत्साहित करना और ज्ञान संपन्न डिजिटल,होनहार युवा पीढ़ी को विकसित करके शिक्षा- संस्कार ध्येय को परिलक्षित एवं फलीभूत करना है।

समय की मांग है ‘DUSR’-

DUSR नियंत्रक बताती हैं कि DUSR जैसी संस्थाओं का निर्माण समय की मांग है जिससे हम समाज में ‘ कौशल अंतराल ‘ को कम करने तथा रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य को पूरा कर सकें । डॉ. राय कहती हैं कि DUSR राष्ट्र के पिछड़े भू – भाग जहां सदियों से ज्ञान और कौशल के भंडार रहे हैं परंतु आधुनिक जटिल व्यवस्था के कारण वे हाशिए पर पहुंच गए ,उन्हें मुख्य धारा से जोड़ने के लिए एक सेतु के रूप में विश्वविद्यालय माध्यम है।

क्या हैं ‘DUSR’ के भावी लक्ष्य –

DUSR की नियंत्रक (Governor) डॉ.रिन्जु राय कहती हैं कि राष्ट्र के पुनरुत्थान और नए भारत के निर्माण के लिए भारत में बेहतरीन जनसांख्यिकी युवा मानस है। देश का युवा वैश्विक चुनौतियों का सामना करने तथा उनसे प्रतियोगिता करने के लिए सामर्थ्यवान और पूर्णत : तैयार है। ‘कौशल पुनरुत्थान डिजिटल विश्वविद्यालय’ ज्ञान और कौशल को एक सार्थक संभल बनाकर अवसरों को सृजित करने , जनमानस को कौशलयुक्त बनाने और युवाओं को अपने लक्ष्य की प्राप्ति हेतु प्रेरित करने के लिए सदैव तत्पर है और यही DUSR के भावी लक्ष्य हैं। डॉ.राय का मानना है कि आत्मनिर्भर भारत विश्व की सर्वश्रेष्ठ ताकत बनेगा क्योंकि हम भविष्य बनाते नहीं भविष्य का निर्धारण करते हैं।और DUSR इस दिशा में सार्थक पहल है।

DUSR’ जैसी संस्थाएं डिजिटल इंडिया को बढ़ावा है-

इसमें कोई दो मत नहीं है कि DUSR जैसी संस्थाएं डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को बढ़ावा है गौरतलब है कि 7 अगस्त 2014 को डिजिटल इंडिया कार्यक्रम प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू किया गया कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य देश को डिजिटल रूप से सशक्त कर समाज को ज्ञान अर्थव्यवस्था में परिणत करना है। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिये ग्रामीण एवं शहरी स्तर पर डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा दे रही है जिससे ‘पारंपरिक अर्थव्यवस्था’ से ‘डिजिटल अर्थव्यवस्था’ की तरफ तेज़ी से बढ़ा जा सके।

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