रालोसपा का जदयू में विलय जल्द

राजनीती में कुछ भी संभव है। अगर कोई किसी का दोस्त या फिर बेहद करीबी है तो ये बिल्कुल भी ज़रुरी नहीं है की वो आपका हमेशा एक अच्छा दोस्त बन कर रहे, हो सकता है कि कल वो आपके खिलाफ़ चुनाव में खड़ा हो जाए। ठीक उसी प्रकार अगर कोई राजनीती में किसी के खिलाफ़ खड़ा है तो ये भी जरुरी नहीं है कि वो आने वाले दिनों में आपके पार्टी में शामिल नहीं हो सकता है या फिर आपको पार्टी में विलय नहीं करा सकता है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो राजनीती में कुछ भी मुमकिन है, जिसकी किसी ने कल्पना भी ना की हो वो भी सकता है।

कुछ यही दृश्य हमें बिहार की राजनीती में देखने को मिल रही है। वो इसलिए क्योंकि जो चुनाव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ़ खड़े थे, अब वो जदयू में विलय कर सकते हैं। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यश्र उपेंद्र कुशवाहा की। दरअसल, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का जल्द ही जदयू में विलय संभव है। रविवार की शाम उपेंद्र कुशवाहा की नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद राजनीतीक ग्लयारें में चर्चाें काफी तेज हो गई है। कयास लगाए जा रहे हैं की रालोसपा का विलय जदयू में मुमकिन है। दरअसल, उन दोनों की मुलाकात करीब आधे घंटे तक चली और तभी से ये संभवना और बढ़ गई हैं।

आपको बताते चलें, पूरे बिहार विधानसभा चुनाव में रालोसपा ने नीतीश कुमार पर काफी तीखे प्रहार किए थे, लेकिन चुनाव के बाद ये पूर्व केंद्रीय सासंद की मुख्यमंत्री से तीसरी मुलाकात थी। मुलाकात के दौरान मौजूद रहे जदयू के वरिष्ठ नेता व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने भी जदयू में रालोसपा के शीघ्र ही विलय होने के संकेत दिए हैं।

दरअसल, उपेंद्र कुशवाहा की वापसी से पार्टी को और मजबूती मिलेगी और एक बार फिर से लव-खुश समीकरण को मजबूती मिलेगी। हलाकिं, पहले भी नीतीश और उपेंद्र कुशवाहा एक साथ रह चूके हैं, लेकिन बीच में थोड़ी दूरी हो गई थी। अब एक बार फिर से इन दोनों का साथ आना क्या कुछ रंग लाएगा, ये देखना दिलचस्प होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *