नकारात्मक दौर की सकारात्मक कहानी

भागलपुर के रहने वाले 25 साल के नवीन की हालत देख घर वाले हिम्मत हार चुके थे। रूमेटिक दिल की गंभीर बीमारी के बाद कोरोना का संक्रमण जानलेवा हो गया था। शरीर में तेजी से बढ़ता संक्रमण फेफड़े को 95% डैमेज कर चुका था। भागलपुर मेडिकल कॉलेज में हालत बिगड़ी तो डॉक्टरों ने IGIMS रेफर कर दिया। 26 मई को भर्ती नवीन की हालत IGIMS में भी बिगड़ती गई, लेकिन डॉक्टरों ने हिम्मत नहीं हारी और युवक को मौत के मुंह से वापस ला दिया। IGIMS के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि डॉक्टरों की टीम ने बड़ा काम किया है।

सांस लेने में हो रही थी काफी दिक्क्त

IGIMS के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. मनीष मंडल का कहना है कि 26 मई को नवीन संस्थान के इमरजेंसी में आया था। भीकमपुर भागलपुर के संक्रमित को पहले भागलपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, लेकिन बाद में गंभीर हालत को देखते हुए उसे IGIMS भेजा गया। नवीन को पहले से रूमेटिक हार्ट की बीमारी थी। डॉक्टर का कहना है कि उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। वह भागलपुर मेडिकल कॉलेज में एक दिन के लिए भर्ती रहा।

लगभग फेफड़ा हो चुका था खराब

डॉक्टरों का कहना है कि जिस वक्त नवीन IGIMS में भर्ती किया गया था, उस समय उसका फेफड़ा 95 प्रतिशत खराब हो चुका था। इस कारण से उस वक्त उसकी हालत काफी नाजुक हो गई थी। CT स्कैन किया गया, जिसका स्कोर 24/25 था। मतलब 95 प्रतिशत तक फेफड़े को कोरोना प्रभावित कर चुका था। इमरजेंसी में भर्ती होने के बाद मरीज को कोविड के लक्षण को देखते हुए उसका इलाज शुरू किया गया।

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