नहीं लगवा रहे हैं पटना के 3 लाख मुसहर वैक्सीन

गरीबी और लाचारी ऐसी कि ये अक्सर चूहा, घोंघा, सितुआ खाकर जिंदगी काटते हैं। दरअसल बिहार में मुसहरों की स्थिति दलितों में सबसे कमजोर है। एक प्रतिष्ठित अख़बार ने मुसहर जाति की महिलाओं और पुरुषों से आशियाना मोड़ पटना स्थित उनके घर पर जाकर बात की। कोरोना में इस बार जहां पटना में बड़ी संख्या में लोग कोविड के शिकार हुए और मौतें भी हुईं।वहीं, दूसरी तरफ मुसहरों में मौत की सूचना नहीं है। लेकिन चिंता की बात यह है कि वे वैक्सीन लेने को हरगिज तैयार नहीं। कहते हैं कि वैक्सीन लेने पर उन्हें बुखार हो जाएगा और मर जाएंगे। वे ऐसे ही ठीक हैं। बल्कि उनको इस बात से काफी गुस्सा आया कि हम क्यों उनसे यह पूछने उनके घर पर पहुंच गए कि वैक्सीन क्यों नहीं ले रहे हैं।

कोई खुद को वैक्सीन लगवाने को तैयार नहीं-

आशियाना मोड़ पर मुसहरों के लिए भवन लालू-राबड़ी शासन काल में बना था। उसका ऊपरी तल्ला जर्जर हो चुका है। नीचे कचरे के बीच जिंदगी है, लेकिन घरों में टीवी लगे हैं। बातचीत में महिलाएं कहती हैं कि हम लोग आराम से कमा-खा रहे हैं। वैक्सीन क्यों लेंगे मरने के लिए? आप ही लीजिए जाकर…। दूसरी महिला कहती है, जाइए आगे बढ़िए…ना…। तीसरी महिला कहती है…. काहे के लिए सुई लेंगे.. मरने के लिए…? चौथी महिला पूछने पर कहती हैं कि हां टीका ले लिए…। लेकिन बातचीत में उनका झूठ पकड़ा जाता है। वह कहती हैं कि हम लोग ये सब नहीं मानते हैं टीका-वीका…। पांचवीं महिला कहती है.. हम टीका नहीं लेंगे… भगवान है जिलाने वाला और बचाने वाला… भूख से मर रहे हैं तो सरकार आ ही नहीं रही है और चले हैं टीका लगवाने..।

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