सेना के रिटायर अधिकारियों ने कोरोना के संभावित इलाज के लिए लिखा प्रधानमंत्री को पत्र।

सितंबर के महीने से इतिहास मे पहली बार गंगा की 5000 KM कि मुंडमन परिक्रमा शुरू करने वाले पूर्व सैन्य अफ़सरों ने गंगा जल पर पुनः शोध कार्य शुरू करने हेतु प्रधानमंत्री और जल शक्ति मंत्री को पत्र लिख हैं । सेना के इन पूर्व अधिकारियों का मानना हैं कि अगर गम्भीर तरिके से गंगा पर शोध किया जाये तो गंगा जल से कोरोना जैसी महामारी का इलाज संभव हो सकता है।

हालांकि गंगा की क्युरिटिव प्रापर्टी पर पहले भी शोधकार्य हुए हैं और ये शोधकार्य आईआईटी रूड़की, आईआईटी कानपुर, भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान यानी आईआईटीआर लखनऊ, इमटेक सीएसआईआर, Institute of Microbial Studies यानी सूक्ष्य जैविकीय अध्ययन केंद्र, The National Environmental Engineering Research Institute यानी नीरी आदि ने किए हैं। कुछ एक अध्ययन यह भी दावा करते हैं कि गंगा का वायरस कुछ मामलों में कुछ वायरस पर भी असर करता है। विभिन्न अध्ययनों में यह साबित हो चुका कि हैजा, पेचिश, मेनिन्जाइटिस, टीबी जैसी गंभीर बिमारियों के बैक्टेरिया भी गंगाजल में टिक नहीं पाते।आईआईटी रूड़की से जुड़े रहे वैज्ञानिक देवेन्द्र स्वरूप भार्गव का शोध है कि गंगा का गंगत्व उसकी तलहटी में ही मौजूद है और आज भी है। गंगा में आक्सीजन सोखने की क्षमता है। कई शोधों में यह भी पाया गया कि बैक्टेरियोफाज कुछ वायरस पर भी असरकारक हैं।

*रिटायर्ड कर्नल और अतुल्य गंगा के संस्थापक, मनोज किश्वर, ने बताया कि गंगा की क्युरिटिव प्रापर्टी को बचाना बहुत जरूरी है। आप जानते ही है कि गंगा ने पहले भी मानवजाति को संकट से बचाया है और हो सकता हैं की कोरोना जैसी महामारी से हमें गंगा ही बचा पाए। गंगा का गंगत्व (बैक्टेरिया खाने वाला वायरस) ही है जिससे हमारी महान नदी सभ्यता की पहचान है। एक समय था जब दुनिया की चार बड़ी नदियों में ये बैक्टेरियोफाज पाया जाता था। समय की मार ने बाकी तीन नदियों और उनकी सभ्यताओं को मिटा दिया। अब सिर्फ गंगा ही है जिसके पास यह अमृत तत्व मौजूद है |कोरोना संकट में हमें पूर्ण विश्वास है की गंगा का गंगत्व इस वायरस से बचाव में सर्वाधिक सक्षम है और इसलिये हमने सरकार से निवेदन किया है कि रेसिस्टेंट बैक्टेरिया से लड़ाई में गंगा जल के संभव सक्षमता को मापने हेतु शोध कार्य करवाएं। ताकि भविष्य में होने वाली अनदेखी बिमारियों से लड़ने और कोरोना जैसी जैविक हमलों जैसी स्थिती में भी गंगा जल के महत्व को समझा जा सके। *

अतुल्य गंगा के बारे मे :-

दुश्मनों का सफाया करने वाले पूर्व सैन्य अधिकारियों ने गंगा नदी की गदंगी का सफाया करने की मुहिम छेड़ी है जिसका नाम अतुल्य गंगा हैं | पूर्व सैन्य अधिकारियों का दल गंगा उद्गम स्थल गोमुख से बंगाल की खाड़ी तक गंगा के किनारे को पैदल नापेंगे. इस यात्रा का उद्देश्य पर्यटन नहीं बल्कि गंगा नदी को स्वच्छ और निर्मल बनाना है. यात्रा में पूर्व सैन्य अधिकारियों का सहयोगी गूगल और आईआईटी दिल्ली भी बन रहा है. गंगा नदी में हर जगह प्रदूषण का स्तर और पानी का बहाव जैसे तमाम बिंदुओं की जांच होगी. इसकी जिओ टैगिंग भी की जाएगी. इस साल से शुरू होने वाली यह मुहिम अगले 11 वर्षों तक चलेगी. आईआईटी के विशेषज्ञ और वैज्ञानिक जैसे तमाम लोग भी पूर्व सैनिकों का साथ देंगे. इस यात्रा में शामिल होने वाले सदस्यों के साथ पीएम नरेंद्र मोदी भी मुलाकात कर सकते हैं |

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