कोरोना से इस जंग में कहां खड़े हैं हम…..?


कोरोना रुपी महामारी की विफल तैयारियां बता रहीं है कि हमारा देश युद्ध से लड़ने को आश्वस्त तो दिख रहा है लेकिन अस्त्र-शस्त्र जैसी कोई सुविधा हमारे पास नहीं है। जनवरी के दूसरे सप्ताह में यह ज्ञातव्य हो गया था कि कोरोना एक देेेश से बाहर निकल अपना प्रसार कर रहा है और सम्पूर्ण विश्व इसकी जद में आने वाला है, और हुआ भी कुछ ऐसा ही, महज एक ही महीने में इसके विस्तार और भयावह स्वरूप हम सबके सामने है।

भारत देश में आधिकारिक तौर पर 30 जनवरी को करोना के प्रथम मरीज की पुष्टि की गयी और अब दो महीने से भी ऊपर वक्त बीत चुका है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है आखिर इस लड़ाई के लिए कितने तैयार हैं हम, क्या वो सारी तैयारियां अब तक हो भी पायीं हैं जो अब से एक महीने पहले हो जानी चाहिए थीं, क्या हमारे पास करोना से पीड़ित मरीजों को पहचानने लायक उपकरण है, क्या स्वास्थ्य विभाग के लोगों के पास खुद को बचाने के लिए व्यवस्था है या फिर दिखने वाली मुस्तैदी भी सिर्फ हवा का बुलबुला है! आइये इन सभी बातों को विश्व स्वास्थ्य संगठन, सरकार एवं सरकार के विभिन्न विभागों से प्रदत्त आंकड़ों के माध्यम से समझते हैं।

कोरोना से बेफिक्र भारत

31 जनवरी को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, 30 जनवरी को भारत में विदेश से आने वाले लोगों की 21 हवाई अड्डों पर जांच शुरू की गयी। पहले दिन 43346 लोगों की स्क्रीनिंग की गयी, और पुणे स्थित National Institute of Virology, में 49 लोगों के सैंपल की जांच की गयी जिसमें एक कोरोना पॉजिटिव निकला और इस तरह भारत देश में करोना का पहला मामला 30 जनवरी को पाया गया। भारत में कोरोना का यह प्रथम मरीज केरल का एक छात्रा है जो चीन के वुहान शहर से आई थी।

सुस्त सरकार

31 जनवरी से देश में 12 अतिरिक्त टेस्टिंग लैब पर जांच प्रक्रिया शुरू हुई जबकि इसके पहले से ही आशंकाएं जताई जा रही थीं लेकिन हमारी सुस्त सरकार ने पहला मरीज मिलने तक उचित एक्शन लेना जरुरी नहीं समझा। स्वास्थ्य मंत्रालय ने 6 फरवरी को बताया कि 5 फरवरी तक कुल 901 लोगों की जांच की जा चुकी थी जिसमे 3 करोना पॉजिटिव मरीज पाए गए थे। 6 फरवरी तक कुल 1108 विमानों के 1,21,000 यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग के जरिये जांच की गयी थी, चीन से लौटे 2528 यात्रियों की पहचान कर पाने में सरकार को 5 फ़रवरी तक समय लग गया इन लोगों में से 2435 लोगों को home quarantine कराया गया एवं 93 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। 12 फरवरी तक देश में कुल 1725 सैंपल की करोना जांच की जा सकी थी। करोना के प्रथम मरीज मिलने के 16 दिन बाद सरकार ने कहा कि हमने तृतीय चरण के विस्तार को रोकने के लिए एक्शन लेना शुरू कर दिया है। जबकि उस वक्त भी उचित स्तर की कार्यवाही नहीं की गयी।

भारत का एकमात्र प्रामाणिक वायरोलॉजी शोध संस्थान

ICMR (Indian Council of Medical Research) के वैज्ञानिक डॉ रमन गंगाखेड़कर के अनुसार 15 फरवरी को हमारें यहां कोरोना की जांच के लिए मात्र 16 टेस्टिंग लैब उपलब्ध थीं और इस समय तक देश में करोना टेस्टिंग की किसी तरह की आधिकारिक प्रक्रिया की पुष्टि नहीं की जा सकी थी। 20 फरवरी को सम्पूर्ण विश्व में 75,748 करोना पॉजिटिव लोग पाए जा चुके थे इस दिन तक हमारे देश में 2722 करोना के परिक्षण हो पाए थे आपको याद दिला दूं ये वो वक्त था जब भारत सरकार अमेरिका के राष्ट्रपति के आवभगत में लगी थी कोरोना को लेकर किसी भी तरह की चिंता उस वक्त दिखाई नहीं दे रही थी।

दुनिया करोना से भयातुर, ट्रम्प-मोदी अहमदाबाद में मस्त

अगले सात दिनों में करोना जांच का यह आंकड़ा महज 2880 तक ही पहुंचा और 9 मार्च को जब पूरी दुनिया में करोना संक्रमित मरीजों की संख्या 1 लाख को पार कर चुकी थी तब हमारे देश में सिर्फ 52 टेस्टिंग लैब और 57 करोना टेस्टिंग के लिए सैंपल संग्रहण केंद्र कोरोना जांच के लिए तैयार किया जा सका था, इस समय तक भारत में करोना अपनी रफ़्तार को पकड़ चुका था 9 मार्च को देश में 43 करोना पॉजिटिव मरीजों की आधिकारिक तौर पर पहचान कर ली गयी थी, इस वक्त तक हमारी सरकार ने विदेश से आने वाले लोगों पर किसी तरह की रोक नहीं लगाई थी, इस लापरवाही का ही नतीजा ये रहा कि अगले सप्ताह भारत में कोरोना पॉजिटिव 2 लोगों की मृत्यु हो गयी, और भारत के 13 राज्यों में कोरोना वायरस ने अपने पांव जमा लिए, पूरे विश्व में इस सप्ताह तक लगभग 5 लाख लोग करोना पॉजिटिव हो चुके थे।

पुणे स्थित ICMR के वायरोलॉजी शोध संस्थान के प्रशिक्षु

14 मार्च तक भारत में 19 विदेशियों को मिलाकर कोरोना पॉजिटिव लोगों की संख्या 67 हो गयी, 14 मार्च तक सरकार को न तो ये पता था की कितनी टेस्टिंग किट हमें चाहिए न ही इसका कोई इंतजाम किया गया था। 19 मार्च को ICMR (Indian Council of Medical Research) द्वारा प्रेस विज्ञप्ति में यह बताया गया कि 18 मार्च को जिन 826 लोगों का कोरोना परिक्षण किया गया है वो सभी करोना नेगेटिव पाए गए हैं, इस विज्ञप्ति में यह भी बताया गया कि करोना परीक्षण के लिए इन लोगों का चयन रेंडम तरीके-से किया गया है, साधारण शब्दों में कहें तो जितने भी संदिग्ध पाए गये थे उनमें से कुछ लोगों को रैंडम चयनित किया गया और उनकी जांच की गयी, सभी की नहीं। 22 मार्च को जारी विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार इस तारीख तक भारत में करोना 23 राज्यों तक पहुंच चुका था और देश में करोना पॉजिटिव लोगों की संख्या 360 तक हो गयी थी, अंततः 22 मार्च को जनता कर्फ्यू लागू कराया गया और उसके बाद 24 मार्च से अगले तीन सप्ताह के लिए देश में लॉकडाउन का निर्णय किया गया।

जांच किट के मामले में भीषण बेपरवाह स्वास्थ्य मंत्रालय

28 मार्च को भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार देश में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या 900 के पार जा चुकी थी और इस दिन तक 19 लोगों की कोरोना के चलते मौत भी हो चुकी थी। उस वक्त तक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन कह रहे थे कि हमारे पास 1 लाख कोरोना टेस्टिंग किट उपलब्ध हैं और 5 लाख़ टेस्टिंग किट को अमेरिका से लाने की मंजूरी दे दी गयी है। मतलब उनके दावे के मुताबिक 138 करोड़ की आबादी में महज 6 लाख लोगों के जांच की व्यवस्था सरकार ने की थी। बाकी सब राम भरोसे।

आखिर पाकिस्तान से भी पीछे कैसे रह गया भारत

30 मार्च तक देश में प्रतिदिन कोरोना टेस्ट की संख्या सिर्फ 3500 व्यक्ति प्रतिदिन थी और प्रति दस लाख केवल 29 व्यक्तियों की जांच कर पाने में हमारे देश का स्वास्थ्य व्यवस्था सक्षम था, जबकि अन्य देशों में यह संख्या हजारों में है। भारत के पडोसी देश पकिस्तान और श्रीलंका भी इससे अधिक मात्र में टेस्ट कर रहा है। वर्तमान समय में देश में 122 सरकारी एवं 47 गैर सरकारी प्रयोगशालों को कोरोना टेस्टिंग के लिए मंजूरी दी गयी है जो कि किसी भी तरह से सार्थक साबित नहीं होती दिख रही न तो जनसंख्या के हिसाब से ही और न ही राज्य/संघ की संख्या के हिसाब से।

देवेश प्रताप सिंह
शोध विश्लेषक

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *