आइये जानते हैं..क्या है..?पप्पू यादव के 32 साल पुराने मामले का ‘क़िस्सा’.!

मशहूर शायर बशीर बद्र साहब का एक शेर है वो यूँ कि “दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों” यह शेर बिहार के मौजूदा हालात और सियासत पर एक दम फिट बैठता है।32 साल पुराने केस में नाटकीय ढंग से हिरासत में लिए गए पप्पू यादव से जुड़ा मामला आख़िर क्या है..? आइये हम बताते हैं।

क्या है मामला-

मुरलीगंज थाना में दर्ज FIR संख्या 9/89 के तरहत ही पप्पू यादव की गिरफ्तारी हुई है। दरअसल यह मामला 29 जनवरी 1989 को शैलेन्द्र यादव की सूचना पर दर्ज किया गया था।सूचक शैलेन्द्र यादव ने बताया था कि मामले की शुरुआत केपी कॉलेज के मैदान से हुई थी मैदान में पप्पू यादव और उनके दोस्तों में एक लड़की से प्रेम विवाह को लेकर वाद-विवाद हो गया था।पप्पू यादव उस समय तथाकथित प्रेम विवाह के खिलाफ थे और उनके सम्बंधित दोस्त विवाह के पक्ष में थे। दोनों गुटों में कहा सुनी हुई जो आगे चलकर विवाद में तब्दील हो गई ।अगले दिन मुरलीगंज के मिडिल चौंक पर घटना के चश्मदीद शैलेन्द्र यादव ,रामकुमार यादव,उमा यादव ,कृतनारायन यादव आदि पान खा रहे थे तभी वहां एक गाड़ी में पप्पू यादव गुजर रहे थे इन लोगों को पैन खाते देख पप्पू यादव ने गाड़ी रोक ली और फिर रामकुमार यादव और उमा यादव को अपने साथ बैठा कर मधेपुरा की ओर निकल गए ।अचानक शेलेन्द्र यादव को लगा जरूर कुछ अनहोनी होने वाली है इसलिए उन्होंने तत्काल इस घटना की जानकारी मुरलीगंज थाना में दी। जिसके बाद मुरलीगंज थाना में केस संख्या 9/89 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया। एक दो दिन में दोनों गुमनाम व्यक्ति अर्थात रामकुमार यादव और उमा यादव सकुशल अपने घर पहुंच गए। इसके बाद पप्पू यादव और उनके सभी दोस्तों में फिर से मोहब्बत कायम हो गई। लेकिन यह मामला जो मुरलीगंज थाने में केस संख्या 9/89 के तहत दर्ज था लगातार चलता रहा।

गिरफ्तारी पर क्या कह रहे हैं सन 89 के दोस्त-

इस मामले के चश्मदीद गवाह कृतनारायन यादव ने कहा है कि जहां तक हम लोग समझ रहे थे कि यह मामला लगभग खत्म हो गया है। इस केस से जुड़ी चीजों को लेकर हमने कई बार मेल पिटीशन भी दिया। मामले के अन्य आरोपी केस से बरी भी हो गए।लेकिन अब सरकार इस मामले पप्पू को बुरी तरह फसा रही है जो ग़लत है कृत नारायण ने बताया कि इस समय इस मामले को उठाना नीतीश कुमार द्वारा बदले की नीयत से की जा रही राजनीति है।

इस घटना को लेकर उस वक्त केपी कॉलेज के प्रोफेसर नागेंद्र यादव कहते है कि ये मामला तो उसी समय खत्म हो गया था लेकिन आज राजनैतिक स्वार्थ के तहत इसे जिंदा करना सरासर गलत है।

कुछ हुआ नहीं फिर गिरफ्तारी क्यों..?

दरअसल यह केस मधेपुरा कोर्ट में चलता रहा और इस मामले की लगातार सुनवाई होती रही।फरवरी 2020 में पप्पू यादव की गिरफ्तारी हेतु वारंट भी जारी किया गया लेकिन पुलिस निष्क्रिय बनी रही सात महीने बाद 17 सितम्बर 2020 को कोर्ट ने वारंट के सम्बंध में पूछा तो पुलिस ने कहा वारंट की कॉपी चौकीदार से खो गई।उस दिन पुलिस को कोर्ट से कड़ी फटकार भी लगी इसके बाद 17 सितम्बर 2020 को फिर से वारंट जारी कर दिया गया।लेकिन पुलिस अब भी नहीं जागी और जारी वारंट पर कुछ नही किया।इस बीच पप्पू यादव समूचे बिहार घूम घूम कर लोगों की सहायता करते रहे,चुनाव प्रचार के दौरान मधेपुरा भी पहुंचे लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई।अब सवाल उठता है आख़िर ऐसा क्यों अगर उनके खिलाफ वारंट था तो गिरफ्तारी लगातार क्यों टाली जाती रही।पुलिस जब इस मामले में पप्पू यादव को गिरफ्तार नही कर पाई तो 22 मार्च 2021 को उनके घर की कुर्की जब्ती का वारंट जारी कर दिया।पुलिस यहां भी फेल हो गयी और पप्पू यादव को नहीं पकड़ पाई फिर उसने कोरोना महामारी के बीच 11 मई 2021 को नाटकीय ढंग से पटना में पप्पू यादव को लॉक डाउन के नाम पर गिरफ्तार किया और उसके बाद उन्हें देर रात मधेपुरा ले गई और फिर रातों रात सुनवाई कर उन्हें जेल में शिफ्ट कर दिया।

अब आगे क्या-

पप्पू यादव भले ही गिरफ्तार है पर यह बात किसी से छिपी नहीं है कि वो बिहार के बाहुबली नेता हैं उनकी गिरफ्तारी के बाद से ही बिहार में माहौल गर्म है।लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं जिसका जबाब वे नीतीश सरकार और मधेपुरा पुलिस से मांग रहे हैं। सबसे रोचक तो यह है कि 32 साल बाद पुलिस नींद से जागी क्यों..? महामारी के इस दौर में गिरफ्तारी की इतनी भी क्या जल्दी थी? पप्पू यादव चुनाव के दौरान पूरा बिहार घूम रहे थे तब पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया.? वह बीच-बीच में मधेपुरा में अपने घर पर भी थे तब उन्हें क्यों अरेस्ट नहीं किया गया ? मधेपुरा पुलिस लगातार लम्बे समय तक गिरफ्तारी वारंट को क्यों दबाए रखी ? और सबसे बड़ा सवाल इस मामले में जो मेल पेटिशन किये गए उन तमाम पेटिशन का क्या हुआ.??

दिलचस्प पहलू-

जिन दो लोगों के अपहरण में पप्पू यादव को गिरफ्तार किया गया है उनमें से एक व्यक्ति जिसका नाम उमाकांत यादव है की बेटी की ढाई माह पूर्व शादी थी जिसमें पप्पू यादव मुख्य अतिथि थे.

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