मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट पर आज हाईकोर्ट में बहस

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को लेकर आज हाईकोर्ट में बहस है दरअसल कोरोना की दूसरी लहर ने देश में मूलभूत सुविधाओं की पोल खोल कर रख दी है। हॉस्पिटल, बेड और ऑक्सीजन की कमी ने हाहाकार मचा रखा है। लॉकडाउन के बीच लोग घरों में कैद हैं, लेकिन देश की इस भयानक स्थिति का सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर कोई असर नहीं पड़ा है। लॉकडाउन के दौरान भी धड़ल्ले से इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य जारी है। सरकार ने इस प्रोजेक्ट को आवश्यक सेवाओं की सूची में शामिल कर दिया है ताकि समय पर निर्माण कार्य पूरा हो सके। इसी बीच पूरे प्रोजेक्ट पर ट्वीटर से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक बहस जारी है। इस प्रोजेक्ट को लेकर आज हाईकोर्ट में बहस होनी है.

विपक्ष के निशाने पर क्यों है प्रोजेक्ट
प्रोजेक्ट की घोषणा के बाद से ही तमाम विपक्षी दल इसके विरोध में हैं। राहुल गांधी समेत तमाम बड़े नेता आए दिन सरकार को घेरते रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान भी निर्माण कार्य चलते रहने से आलोचनाएं और तीखी हो गई हैं। सरकार ने इस प्रोजेक्ट को आवश्यक सेवाओं की सूची में शामिल कर दिया है ताकि लॉकडाउन के दौरान भी काम नहीं रुके, इसके बाद विरोध और बढ़ गया है। नेताओं का कहना है कि देश की वर्तमान हालात को देखते हुए ये गैर जरूरी खर्च है। इसके बजाय स्वास्थ्य सुविधाओं पर ये खर्च किया जा सकता है।

हाईकोर्ट में आज सुनवाई किसलिए हो रही है?
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर रोक लगाने के लिए सोहेल हाशमी और अन्या मल्होत्रा द्वारा अधिवक्ता सिद्दार्थ लूथरा के जरिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी, जिस पर 12 मई को सुनवाई हुई। इसी सुनवाई से एक दिन पहले केंद्र सरकार ने भी हलफनामा दायर कर इस याचिका को बेबुनियाद बताते हुए कहा था कि ये प्रोजेक्ट में बाधा डालने का तरीका है। हाईकोर्ट पूरे मामले पर अगली सुनवाई 17 मई यानी आज करेगा।

याचिकाकर्ताओं की क्या मांग है?
याचिका में मांग की गई है कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का काम तुरंत रोका जाना चाहिए, क्योंकि दिल्ली में लॉकडाउन लगा हुआ है। इन मजदूरों को दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से रोजाना काम के लिए यहां लाया और ले जाया जा रहा है। इससे इलाके में कोरोना फैलने का खतरा है।

केंद्र ने अपने हलफनामे में क्या कहा?
केंद्र ने हलफनामे में कहा है कि मजदूरों को यहां से लाने ले जाने का आरोप बिल्कुल बेबुनियाद है। 19 अप्रैल से पहले इस प्रोजेक्ट पर 400 मजदूर काम कर रहे थे, लेकिन फिलहाल 250 मजदूर यहां काम कर रहे हैं, जो यहीं रह रहे हैं। सभी मजदूरों का कोरोना टेस्ट भी कराया गया है और उन्हें तमाम मेडिकल सुविधाएं भी दी गई हैं। काम के दौरान मजदूर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी कर रहे हैं। साथ ही सभी मजदूरों का हेल्थ इंश्योरेंस भी किया गया है।

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