भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल कहा -पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल नहीं बढ़ाया जाना अलोकतांत्रिक

राज्य के पंचायतों में पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल सरकार ने नहीं बढ़ाया। इसके बजाय सरकार ने परामर्शी समिति का गठन करेगी। भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल ने पंचायतों को भंग किए जाने के सरकार के निर्णय की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इस अलोकतांत्रिक निर्णय के खिलाफ भाकपा-माले एक बार फिर राज्यव्यापी विरोध में उतरेगी। 3 जून को पूरे राज्य में प्रतिवाद किया जाएगा।

नीतीश कुमार का है तानाशाही रवैया

उन्होंने कहा कि बिहार की जनता की मांग को सरकार ने अनसुना किया है और नीतीश कुमार केंद्र सरकार की तरह तानाशाही चला रहे हैं। जनप्रतिनिधियों की भूमिका को कम करना इस भयावह दौर में आत्मघाती साबित होगा। उन्होंने कहा कि कोविड के प्रति जागरुकता अभियान में पंचायत प्रतिनिधियों के अनुभव का बेहतर इस्तेमाल हो सकता था, लेकिन सरकार ने इस पर तनिक भी ध्यान नहीं दिया। यदि पंचायतों के कार्यकाल बढ़ाने का कोई नियम नहीं था, तो क्या सरकार अध्यादेश नहीं ला सकती थी। दरअसल, सरकार की मंशा ही कुछ और थी।

सरकार ने हमारी राय नहीं मानी

वहीं, RJD के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने कहा कि हमारी पार्टी ने मांग की थी कि जनप्रतिनिधियों की अंतरिम व्यवस्था चुनाव होने तक रहने दी जाए। लेकिन सरकार ने इस राय को नहीं माना। नई व्यवस्था का कुछ स्वरूप ही अभी स्पष्ट नहीं है।

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