बिहार में जला दिया गया बच्चों का भोजन

कोरोना का खतरा टला नहीं है। दूसरी के बाद अब तीसरी लहर की दहशत है। संकट बच्चों की सुरक्षा को लेकर है। आशंका है कि तीसरी लहर में सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित होंगे। उनकी सेहत और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की चिंता हर गार्जियंस को है। बच्चों की सेहत और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को लेकर जब देश के एक प्रतिष्ठित अख़बार ने पड़ताल की तो बड़ा खुलासा हुआ है। पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कुपोषित बच्चों के लिए बनाया गया पुनर्वास केंद्र मनमानी का शिकार हो गया है। बच्चों के लिए आया खाने का सामान बाहर खुले में फेंक दिया जाता है या फिर जला दिया जाता है।

पड़ताल में सामने आई हकीकत

अख़बार द्वारा पड़ताल में यह बात सामने आई कि पुनर्वास केंद्र के भवन के पीछे अधिक मात्रा में खाद्य सामग्री खुले में फेंकी गई है। इसमें अधिक मात्रा में ऐसे सामान हैं, जिनकी पैकिंग तक नहीं खुली है। कुछ सामान तो बोरे में बंद हैं और कुछ को जला दिया गया है, जिसकी राख मौके पर दिखाई पड़ी। पुनर्वास केंद्र के पास सामान कहां से आए इसका जवाब देने वालों कोई नहीं है। खाद्य सामग्री में सबसे अधिक नमक के पैकेट दिखाई पड़े। सत्तू और बेसन के पैकेट भी खुले में फेंके गए हैं। अब सवाल यह है कि पुनर्वास केंद्र के किचन में इन सामान का उपयोग क्यों नहीं किया गया? अगर स्टोर की कमी के कारण बाहर खुले में फेंका गया तो फिर अन्य सामान को जलाया क्यों गया? ऐसे कई सवाल है जो पुनर्वास केंद्र में भर्ती बच्चों की सेहत पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।

पुनर्वास केंद्र पर नहीं मिली जानकारी

अख़बार की टीम ने जब पुनर्वास केंद्र की पड़ताल की तो वहां कोई जिम्मेदार नहीं मिला। कुर्सी खाली पड़ी थी, वार्ड में मौजूद एक नर्स ने फोटो लेने से मना करते हुए कहा कि प्रभारी अभी चली गई हैं। किचन और पुनर्वास केंद्र से जुड़ी कोई भी जानकारी साझा करने से नर्स ने मना कर दिया। नर्स ने प्रभारी का नंबर देने से मना करते हुए यह भी नहीं बताया कि उनसे मुलाकात कब हो सकती है। वार्ड में बच्चे भर्ती थे, उनकी दवाएं भी चल रही थीं लेकिन उनके बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी गई।

ऐसे मनमानी से बच्चों पर खतरा

शारीरिक रूप से कमजोर बच्चों को लेकर चलाए जा रहे सरकार के विशेष अभियान में जिम्मेदारों की मनमानी से बच्चों की सेहत पर बड़ा खतरा है। सामान जो किचन के लिए आ रहा है उसे बाहर खुले में फेंका जा रहा है। ऐसे में कुपोषित बच्चों में कोरोना जैसे खतरनाक वायरस से लड़ने की क्षमता कहां से आएगी, यह बड़ा सवाल है।

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