हेल्थ सेक्टर में सौर ऊर्जा के व्यापक इस्तेमाल से मजबूत होगा बिहार

पटना, 10 फरवरी, 2021: सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) ने बिहार के स्वास्थ्य केंद्रों में विकेंद्रीकृत अक्षय ऊर्जा (डेसेंट्रलाइज्ड रिन्यूएबल एनर्जी-डीआरई ) की सकारात्मक भूमिका पर जागरूकता फ़ैलाने के उद्देश्य से आज पटना में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में शहर के प्रसिद्ध डॉक्टरों और हेल्थ प्रोफेशनल्स ने भाग लिया, जिन्होंने राज्य सरकार से स्वास्थ्य क्षेत्र में डीआरई समाधानों को व्यापक रूप से लागू करने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया, ताकि पब्लिक हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर हो सके और ग्रामीण स्तर तक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ सके। यह आयोजन एक पब्लिक कैंपेन “बोलेगा बिहार” का एक हिस्सा है, जिसका उद्देश्य राज्य में समग्र विकास सुनिश्चित करने की रणनीति के केंद्र में डीआरई सोल्यूशन्स को रखना है, ताकि इसके जरिए जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निबटने में सक्षम अर्थव्यवस्था का निर्माण और जनस्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ कर बिहार को सततशील प्रगति की राह पर अग्रसर किया जा सके।


इसी कड़ी में पटना के कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल के समीप सोलर एनर्जी पर आधारित एक बिलबोर्ड बैनर को लगाया गया है, ताकि इसके जरिए सोलर सोल्यूशन के लाभों के प्रति जनजागरूकता का प्रसार हो. प्रतिदिन 1.5 किलोवाट से चलने वाले इस बैनर में जितनी सोलर ऊर्जा लगी है, उतने से किसी हॉस्पिटल में प्रतिदिन 10 वेंटीलेटर चलाये जा सकते हैं (एक वेंटीलेटर के लिए आम तौर पर 80 से 150 वाट लगता है) और कई लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है. जनजागरूकता के लिए सौर ऊर्जा चालित यह बैनर आगामी 26 फरवरी तक लगा रहेगा.
इस अवसर पर बिहार वॉलेंटरी हेल्थ एसोसिएशन के डॉ राजू शर्मा ने कहा, “स्वास्थ्य क्षेत्र एक ऐसा महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जहां चौबीसों घंटे ऊर्जा की जरूरत होती है। राज्य के अधिकतर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में लोगों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए गुणवत्तापरक और विश्वसनीय ऊर्जा सुविधा की जरूरत है। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में डीआरई के जरिये प्रभावी और स्थायी तरीके से स्वास्थ्य लक्ष्यों को हासिल किये जाने की जरूरत है। राज्य में कोविड महामारी के परिदृश्य में हेल्थ एवं एनर्जी का एकीकरण (हेल्थ एनर्जी इंटीग्रेशन) जरूरी है।”


यद्यपि राज्य में बिजली की आपूर्ति में काफी सुधार हुआ है, लेकिन गुणवत्तापूर्ण बिजली प्रभावी स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिहाज से बेहद जरूरी है। बेहतर बिजली आपूर्ति स्वास्थ्य सम्बन्धी आधारभूत संरचनाओं को सुदृढ़ करने के अलावा जरूरी चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, दवाइयों के भंडारण की सुविधा, स्वच्छ पानी की आपूर्ति और कुशल कर्मचारियों के स्वास्थ्य केंद्रों में बने रहने के लिए जरूरी है। रूरल हेल्थ स्टैटिस्टिक्स ऑफ इंडिया (2009 और 2015) यह संकेत करता है कि ग्रामीण स्तर पर कई स्वास्थ्य केंद्रों के लिए बुनियादी सेवाओं और बुनियादी ढाँचे को पूरा करने के मामले में बिहार अभी भी पीछे है।


स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति में सुधार लाने में सोलर समाधानों की भूमिका और जनस्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता के बारे में पटना के कुर्जी होली फैमिली अस्पताल से जुडी डॉ सीमा रंजन ने कहा कि “कुर्जी होली फैमिली अस्पताल खुद सौर प्लांट से काफी लाभान्वित हो रहा है। स्वच्छ ऊर्जा पर आधारित समाधान के रूप में डीआरई मॉडल डीजल जनरेटर सेटों पर कम निर्भरता और वायुमंडल में कम कार्बन फुटप्रिंट के कारण पर्यावरण की रक्षा करने में काफी मदद करता है। सोलर फ्रीजर, बेबी वार्मर, वैक्सीन रेफ्रिजरेटर और हेल्थ केयर किट आदि जैसे अभिनव सोलर समाधानों के जरिए यह सामान्य और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने में सक्षम है। इससे राज्य के हेल्थ इंडीकेटर्स को भी बेहतर करने में मदद मिलेगी।”
सीड का मानना ​​है कि बिहार में हेल्थ और एनर्जी इंटीग्रेशन पर आधारित एक रोडमैप की आवश्यकता है, जो ‘सोलराइजेशन ऑफ़ हेल्थ’ को बढ़ावा देते हुए यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज की दिशा में और राज्य भर में निचले स्तर तक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

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