रामविलास पासवान के निधन के बाद बिहार की सियासत में अकेले पड़े चिराग..

बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले जमुई सासंद चिराग पासवान की मुशकिलें और बढ़ते हुए नज़र आ रही हैं। दरअसल, स्वर्गीय राज्य सभा सासंद रामविलास पासवान के जाने के बाद चिराग ने चुनाव अकेले लड़ने का फैसला लिया। हालाकिं,पार्टी बेहतरीन प्रर्दशन तो नहीं कर पाई लेकिन पूर्ण रुप से जदयू के लिए वोटकटवा सबित हुई। उनके पिता के निधन बाद से ही चिराग पासवान तन्हा हो गए हैं। वो इसलिए क्योंकि लोजपा के कई कार्यकर्ता अब पार्टी का दामन छोड़ रहे हैं।

बता दें, बीते ही कुछ दिन पहले लोजपा के एक सो से दो सो कार्यकर्ताओं ने लोजपा का दामन छोड़ बीजेपी खेमे में शामिल हुए थे। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जैसवाल ने उनको बीजेपी की सदस्यता दिलाई थी और उसके कुछ ही दिन पहले चिराग पासवान के ही पार्टी के कई नेता जदयू में शामिल हुए थे। दरअसल, कई पार्टी के लोगो का कहना है कि पार्टी में लोकतंत्र नहीं है, चिराग सिर्फ कुछ लोगों के कहने पर चलते हैं। लेकिन अब तक जो लोजपा अध्यक्ष के साथ थे, उनके भी बिछड़ने के कयास लगाए जा रहे हैं। दरअसल, बिहार विधान परिषद में लोजपा की एकमात्र प्रतिनिधित्व करने वाली नूतन सिंह ने अब भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है।

पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में चिराग ने खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘हनुमान’ बताकर चुनावी मैदान में अपने पार्टी को उतारा था। ऐसी स्थिति में भाजपा के नेताओं ने यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने बिहार दौरे में यह कहा था कि राजग में सिर्फ भाजपा, जदयू, विकासशील इंसान पार्टी और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा शामिल है। माना जाता है कि इसके बावजूद लोजपा मतदाताओं में भ्रम पैदा करने में सफल रही थी। यही कारण है कि चुनाव में लोजपा भले ही एक सीट पर विजयी हुई हो लेकिन जदयू को कई सीटों पर नुकसान पहुंचाया था। हालांकि चिराग के लिए यह दांव अब उल्टा पड़ गया लगता है।

पूरे बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान चिराग पासवान ने नीतीश कुमार के खिलाफ़ बगावती तेवर अख्तिार किए थे और जिस भी जनसभा में जाते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चुन चुन कर खामियां बताते थे। बता दें, चुनाव में जदयू राज्य में तीसरे नंबर की पार्टी बन कर सामने आई थी। जदयू के नेता इसके लिए सबसे बड़ा जिम्मेदार लोजपा को मानते हैं। हालांकि जदयू के नेता लोजपा को लेकर खुलकर तो कुछ नहीं बोलते हैं, लेकिन इतना जरूर कहते हैं कि लोजपा के विषय में भाजपा को सोचना है। इधर, लोजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके पूर्व विधायक रामेश्वर चौरसिया को भी लोजपा से मोहभंग हो गया और उन्होंने पार्टी छोड़ दी। लोजपा के एकमात्र विधायक राजकुमार सिंह के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने के बाद भी अटकलों का दौर तेज हो गया है। अब ये देखना अहम होगा कि कैसे चिराग अपने पार्टी को बिखड़ने से बचाते हैं। हालाकिं,ये उनके लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है।

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