एक बूंद खून के टेस्ट से कोरोना के 6 स्टेज का पता चलेगा – PMCH ने रिसर्च कर किया दावा

PMCH के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के HOD डॉ एसएन सिंह ने देश को कोरोना की तीसरी लहर से बचाने का तरीका खोजा है। रिसर्च के आधार पर उनका दावा है कि रैपिड एंटिजन और रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट को एक साथ करने से कोरोना की तीसरी लहर देश में नहीं आ सकती है। डॉ. सिंह का दावा है कि इस मॉडल से कोरोना के 6 स्टेज का पता चलेगा। उन्होंने पीएम मोदी को पत्र लिखकर इस मॉडल के 5 फायदे भी गिनाए हैं। साथ ही पूरे देश में इसे लागू करने की अपील की है। उन्होंने पहले खुद, फिर पत्नी पर रिसर्च किया। करीब 100 लोगों पर रिसर्च के बाद वे तीसरी लहर को रोक लेने का दावा कर रहे हैं।

पहले खुद पर फिर परिवार पर किया रिसर्च-
एचओडी डॉ एसएन सिंह ने पीएम के अलावा इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के डायरेक्टर जनरल बलराम भार्गव और नीति अयोग के सदस्य वी के पाल को भी पत्र लिखा है। उन्होंने रिसर्च की शुरुआत सबसे पहले खुद पर ही की। एक सप्ताह, दो सप्ताह और तीन सप्ताह तक एंटीबॉडी जांच करते गए। इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी पर जांच को लेकर शोध किया। परिवार के अन्य सदस्यों पर शोध करते-करते 100 लोगों की जांच की इसमें उन्हें बड़ी सफलता मिली और वह मॉडल मिल गया जिस पर चाइना और साउथ कोरिया भी काम कर चुका है। डॉ. एसएन सिंह बिहार के काफी चर्चित और प्रतिष्ठित शोधकर्ता हैं।

प्रधानमंत्री को बताए ‘जांच के नए मॉडल’ के फायदे-
डॉ एसएन सिंह ने PM नरेंद्र मोदी को भेजे गए रजिस्टर्ड पत्र और ईमेल में लिखा है कि ऐसे ही मॉडल से चाइना और साउथ कोरिया के साथ दुनिया के कई देश कोरोना पर काबू पा चुके हैं। उन्होंने PM को भेजे पत्र में बताया है कि रैपिड एंटीजन टेस्ट और रैपिट एंटीबॉडी टेस्ट दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। दोनों टेस्ट का एक साथ स्क्रीनिंग टेस्ट शुरू करने से देश को बड़े फायदे होंगे।

कौन हैं डॉ.एसएन सिंह –
PMCH के माइक्रोबायोलॉजी के HOD डॉ एसएन सिंह बिहार के रोहतास जिले के नोखा के रहने वाले हैं। 1980 में उन्होंने नालंदा मेडिकल कॉलेज से MBBS किया था। वे MBBS में गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं। उन्होंने MD माइक्रो एंड पैथ की डिग्री ली है। साथ ही डिप्लोमा इन क्लीनिकल पैथ भी किया है। कालाजार का रैपिड एंटीबॉडी किट के निर्माण में उनकी बड़ी भूमिका रही है। अमेरिका के डॉ एस बी चौधरी के निर्देशन में उन्होंने कालाजार के रैपिड एंटीजन किट के लिए बड़ा योगदान दिया है। वे दुनिया के पहले ऐसे डॉक्टर हैं जिन्होंने एक लाख से ज्यादा बोन मैरो और एस्क्लीरिक फंक्शन टेस्ट किया है।

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