कानून-व्यवस्था में गिरावट पर अब बीजेपी सांसद लेने लगे नीतीश की क्लास

चमकी बुखार से 160 से अधिक मासूमों की मौत के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जिम्मेवार ठहराते हुए बीजेपी के विधान पार्षद टूना जी पांडेय ने पिछले दिनों नैतिक आधार पर उनसे इस्तीफा देने की मांग की थी। लोकसभा चुनाव के बाद बहुमत से कहीं अधिक सीट जीतने के बाद तो जदयू के प्रति बीजेपी के रवैये में बदलाव का यह स्पष्ट परिचायक था। अब नेतृत्व के इशारे पर बीजेपी की शिवहर सांसद रमा देवी ने बिहार में लगातार बिगड़ती कानून व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाया है जो विपक्ष उठाता तो बात गले के नीचे उतरती। मगर यहां तो सांसद ने मुख्यमंत्री का बचाव करने की वजाय उन पर ही सवाल दाग दिया।

रमा देवी ने नीतीश सरकार के जीरो टॉलरेंस वाली दलील को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की कमान संभालने के बाद शुरू में नीतीश कुमार कानून व्यवस्था सुधारने में काफी सफल रहे मगर आज तो कानू व्यवस्था की स्थिति बिल्कुल चौपट हो गई है। राजधानी तक में सरकार की नाक के नीचे चोरी, डक्ेती, छिनैती आदि के मामले हो रहे हैं, सूबे में लोगों पर लगातार हमले हो रहे हैं, सरेआम हत्याएं हो रही हैं, रेप हो रहा है, दिन दहाड़े चोरी की घटनाएं हो रही हैं पर नीतीश सरकार कुछ कर पाने में अक्षम साबित हो रही है। उनका कहना है कि नीतीश सरकार कायदे से काम करती रहती तो तस्वीर कुठ अलग होती। हत्या व दो गुटों में भिड़ंत की वजह यह है कि ज्यादातर मामले जमीन से जुड़े होते हैंऔर यदि एसपी, डीएम, बीडीओ और सीओ जैसे बड़े अधिकारी सही समय पर सही तरीके से इस तरह के मामलों पर एक्शन लें तो अपराध पर काफी हद तक रोक लगाया जा सकता है।

सवाल यह है कि बिहार में नीतीश सरकार की सहयोगी पार्टी बीजेपी के विधायक-विधान पार्षद भी मंत्री पद पर काबिज हैं ऐसे में उनका भी कोई दायित्व बनता है या नहीं? यह बात सही है कि केंद्र में दुबारा मोदी सरकार बनने के बाद एनडीए के सहयोगी दल जदयू के अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भाव काफी गिरा है। इसका नमूना चमकी रोग बुखार से 172 बच्चों की मौत के मामले में देखने को मिला जब स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय से इस्तीफा लेने के उनके सुझाव को बीजेपी नेताओं ने खारिज कर दिया। ऐसे में फंस गये हैं नीतीश कुमार, यदि मंगल पांडेय के इस्तीफे के लिए दबाव डालते हैं तो उनकी कुर्सी सलामत नहीं रह पायेगी।

बीजेपी के इस रवैये से साफ जाहिर है कि उसे नीतीश कुमार की जरूरत नहीं, भले ही मुख्यमंत्री बनने के लिए नीतीश कुमार को उसके सहारे की जरूरत हो। कुर्सी बचाने के लिए यदि नीतीश कुमार धारा 370 समाप्त नहीं करने का अपना स्टैंड त्याग कर बीजेपी का समर्थन करने लगें तो कोई ताज्जुब नहीं। 14 वर्ष से बिहार के मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार का वह दुर्दिन आ गया कि सांसद तक उन्हें निर्देश देने लगे। कुर्सी का लोभ जो न कराये सो कम!

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