उत्तर प्रदेश शासन की शिथिल प्रणाली पर लग रहे प्रश्नचिन्ह।

हरदोई: कुपोषण में बाल विकास विभाग की निर्णायक भूमिका है, परंतु सरकारी मशीनरी की खाओ कमाओ नीति के चलते मई महीना पूरा बीतने पर है परंतु नौनिहालों, गर्भवती व धात्री महिलाओं को अभी तक पोषाहार नहीं मिला है। कोविड-19 महामारी के चलते ग्रामीण क्षेत्र में लोगों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में कुपोषण का दायरा धीरे-धीरे नौनिहालों, गर्भवती व धात्री महिलाओं में बढ़ रहा है। सरकार भले ही स्वस्थ भविष्य की इबारत लिखने के लिए लाख प्रयास करे परंतु सरकारी तंत्र उनके उद्देश्य पर पानी फेरने का कार्य करने से बाज नहीं आ रही है। पूरा महीना बीत जाने के बाद भी अभी तक पोषाहार न वितरण होना सरकारी सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर रहा है। कहीं बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार तो नहीं हुआ है। सरकार ने पोषाहार वितरण में हो रही गड़बड़ी पर अंकुश लगाने के लिए निर्देश जारी करते हुए बताया है कि ग्राम प्रधान, ग्राम सदस्य व मात् समिति का होना आवश्यक है। वितरण पंजिका पर लाभार्थियों के हस्ताक्षर भी कराए जाएं कोविड-19 महामारी के समय में भी प्रशासन की इस कार्यशैली को लेकर आम जनमानस में सरकार के प्रति विश्वास कमजोर हो रहा है। पोषण अभियान इस दिशा में बिल्कुल एक सामाजिक पहल है। उचित समय पर पोषण ना मिलने के कारण बच्चों का सर्वांगीण विकास नहीं हो पाता है। कुपोषण की जड़ें धीरे-धीरे बढ़ती चली जा रही हैं परंतु सरकार की जवाबदेही न होने के कारण आम जनमानस को योजनाओं का सही तरीके से लाभ नहीं मिल पाता है। इस पूरे प्रकरण में जिला कार्यक्रम अधिकारी हरदोई ने बताया कि अभी तक शासन स्तर से पोषाहार नहीं प्राप्त हुआ है।

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